अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव : पाचंवे दिन पांच महाद्वीप के योगियों ने किया पांच रूद्राक्ष के पौधों का रोपण

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अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में योग का व्याकरण,ताकि जीवन का महाकाव्य स्वयं लिख सकें-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश । परमार्थ निकेतन ऋषिकेश, आयुष मंत्रालय- भारत सरकार, उत्तराखण्ड पर्यटन विकास बोर्ड, एवं गढ़वाल मण्डल विकास निगम द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित 29 वें वार्षिक विश्व विख्यात अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के पांचवे दिन की कक्षायें  संचालित हुयी। योग महोत्सव में 101 देशों से आये योग प्रतिभागी सहभाग कर रहे है । इस महोत्सव में 70 से अधिक पूज्य संतों, विश्व विख्यात योगाचार्यो एवं योग विशेषज्ञों द्वारा योग विधा के 150 विभिन्न आयामों का अभ्यास कराया जा रहा है। आज के दिन की शुरूआत कैलिफोर्निया, अमेरिका से आये गुरूशब्द सिंह खालसा के द्वारा कुण्डलिनी योग के अभ्यास के साथ हुयी।

बालीवूड फिल्मी सितारों की योगाचार्य मुम्बई निवासी दीपिका मेहता ने ’मैसूर मोर्निग योग श्रंखला’ की शुरूआत की। दीपिका विश्व विख्यात योग शिक्षिका, फिटनेस विशेषज्ञ एवं टेलीविजन कलाकार है। प्रातःकालीन अन्य कक्षायें योगाचार्य परमानन्द अग्रवाल, शिल्पा जोशी, योगाचार्य विश्ववेक्तू एवं योगाचार्य चरतसिंह द्वारा सम्पन्न करायी गयीं।

तत्पश्चात गंगा के तट पर हवाई द्वीप अमेरिका से आयी आनन्द्रा जार्ज द्वारा प्रातःकालीन नादयोग साधना का अभ्यास कराया गया। अल्पाहार के पश्चात अमेरिका के गुरूमुखसिंह खालसा द्वारा कुण्डलिनी योग का अभ्यास कराया गया। योग आसन की अन्य कक्षाओं में आस्ट्रेलिया के मार्क राबर्ट द्वारा अष्टांग प्राथमिक श्रंखला, अमेरिका के टोमी रोजेन द्वारा ’कुन्डलिनी एक्सप्रेस’, बैंगलोर के एच एस अरूण द्वारा ’अंयगर योग’, तथा संदीप देसाई द्वारा ’ताई ची’ योग का अभ्यास कराया गया। ’क्वीन आफ सोस’ के नाम से विख्यात उोदाका योग की सह-संस्थापक फा्रन्सेस्का केसिया द्वारा ’सोस के रहस्य’ का अनावरण विषय पर कक्षा सम्पादित की गयी।

दोपहर के सत्र में अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशिका साध्वी भगवती सरस्वती एवं विश्व विख्यात वैज्ञानिक ब्रूस लिप्टन ने संयुक्त रूप से ’स्वास्थ्य, प्रसन्नता एवं सम्पूर्णता युक्त जीवन कैसे जिया जाये विषय पर धार्मिक परिचर्चा करते हुये कहा, ’हम अपने अनुवांशिक जीन, शरीर के शिकार नहीं है अपितु हम अपने पर्यावरण के निर्माता है। हम अपने विचारों के माध्यम से ऊर्जा के संघवाहक है इस प्रकार जिस संसार में हम रहते है उसका निर्माण हमारे विचारों से ही होता है। हमें एक साथ मिलकर शान्ति और प्रेम की प्रगाढ़ता़ के विषय में सोचना चाहिये। योग महोत्सव संसार के उपचार का केन्द्र है। यह अन्तःकरण के विकास का स्रोत्र है जिससे मानवता की रक्षा होगी। उसके पश्चात उन्होने विज्ञान एवं आध्यात्मिकता के बीच सेतू कैसे निर्मित किया जाये एवं परिस्थितियों का कैसे सामना किया जाये विषय को समझाने का प्रयास किया गया। न्यूयार्क के विश्व विख्यात योगाचार्य जूल्फ फेबर द्वारा जीवमुक्ति योग का, पद्म श्री भरत भूषण द्वारा भरत योग का तथा अमेरिका की योगाचार्य लौरा प्लम्ब द्वारा राॅक भक्ति का अभ्यास कराया गया। अमेरिका की योगाचार्य किया मिलर ने कहा, ’मैं चाहती हूँ कि लोग अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की ओर आकर्षित हों क्योकि यहां पर प्राचीन पारम्परिक योग विद्या का सारगर्भित ज्ञान प्राप्त होता है। मेरे लिये तो यह उत्सव व महोत्सव से भी बढ़ कर है। यहां पर वैश्विक समुदायरूपी घर में आने के समान है; उन लोगांे के मध्य आने के समान है जो योग से प्रेम करते हंै।’

अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशिका साध्वी भगवती सरस्वती एवं ब्रूस लिप्टन के साथ मिलकर सभी योगियों ने प्रकृति संरक्षण, पृथ्वी संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण एवं जल संरक्षण का संकल्प लिया तथा समस्त योगियों ने मानवता की सेवा का भी संकल्प लिया गया।

दोपहर के पश्चात की कक्षाओं में मूलतः ऋषिकेश के चीन निवासी योगाचार्य मोहन भण्डारी द्वारा कूल्हा एवं कंधा के उचित निष्पादन की कक्षा सम्पन्न की गयी।

परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष, गंगा एक्शन परिवार के प्रणेता एवं ग्लोबल इण्टरफेथ वाश एलायंस के सह-संस्थापक पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने योगियों को दिये संदेश में कहा ’योग महज धर्म और आध्यात्मिकता तक सीमित नहीं है। यह विज्ञानपरक होता है। यह कल्याण का विज्ञान है; यह युवा अवस्था की चिर प्रफुल्लता का विज्ञान है; तन, मन और आत्मा के संकलन का विज्ञान है। इस अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में योग का व्याकरण सिखाया जाता है ताकि आप जीवन का महाकाव्य स्वयं लिख सकें।’

अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव की निदेशिका साध्वी भगवती सरस्वती जी ने जीवन जीने की कला के बारे में समझाते हुये कहा कि ’प्रत्येक विपरित स्थिति हमें जीवन के नये आयाम सिखाती है। उसमे में भी एक मधुर गीत होता हैं। हमें गीतों पर ध्यान देना चाहिये क्योंकि परिस्थितियां अनुकुल या प्रतिकुल नहीं होती बल्कि उनके प्रति हमारा नजरिया सकारात्मक या नकारात्मक बन जाता है। अतः ध्यान के अभ्यास से ही जीवन के हर क्षण में सकारात्मकता का समावेश होता है। हम अपनी समस्याओं के लिये
दुनिया को दोषी मानते है; हम सोचते है कि हमारे पास ये होता या ओ होता तो हम प्रसन्न होेेते किन्तु प्रसन्नता, आनन्द और शान्ति का वास्तविक स्रोत तो हमारे अन्दर ही है। अन्तःकरण से जुड़ना ही आनन्द की वास्तविक कुन्जी है।’


पावन गंगा आरती में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, स्वामी नारायण गुरूकुल विद्यापीठ के पूज्य संत माधवप्रियदास जी एवं पूज्य प्रेम बाबा जी का पावन सानिध्य एवं आशीर्वाद प्राप्त हुआ। पूज्य स्वामी जी ने अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में सहभाग कर रहे न्यूयार्क के विश्व विख्यात योगाचार्य जूल्फ फेबर और हवाई द्वीप अमेरिका से आयी संगीतज्ञ आनन्द्रा जार्ज को उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिये पुरस्कृत किया गया। पूज्य स्वामी जी ने परमार्थ परिवार के सेवक उर्मिला एवं रूचि को भी उनकी विशिष्ट सेवा के लिये सम्मानित किया गया।

रात्रिकालीन कार्यक्रम में  ’मिल्टन के रहस्य’ नामक फिल्म दिखायी जायेगी जो ’एकर्ट टोल’ की पुस्तक पर आधारित है। मिल्टन एक 12 वर्ष का बालक है जो आर्थिक और सामाजिक रूप से अकल्पनीय दुनिया में पल-बढ़ रहा है। जब उसके दादा उससे मिलने आते है तो मिल्टन अतीत के चिंतन और भविष्य की चिंता में डूबा रहता है जिसकी वजह से उसे जीवन के आनन्द का अनुभव नहीं पाता।