उड़ी के बाद अब सबसे बड़ा हमला

आतंकियों के निशाने पर था नगरोटा का आयुध भंडार

आतंकी थे भारी हथियारों से लैस 

लश्कर ए-ताइबा के हाथ की है आशंका

जम्मू : पुलिस वर्दी में आए आतंकियों के दो फिदायीन हमलों में मंगलवार को सेना के दो मेजर और पांच जवान शहीद हो गए। भारी हथियारों से लैस छह आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराने से पहले बीएसएफ के डीआईजी समेत आठ अन्य जवान भी घायल हुए हैं। आतंकवाद के 26 साल के इतिहास में पहली बार नगरोटा सेना मुख्यालय पर हमला करने वाले आतंकियों में से तीन को सेना ने ढेर कर दिया।

आतंकियों ने 12 जवानों, 2 महिलाओं और 2 बच्चों को बंधक बना लिया था। बंधकों को सुरक्षित निकालने की कोशिश में एक मेजर और दो जवान शहीद हुए। उधर, सीमावर्ती सांबा जिले में रामगढ़ सेक्टर स्थित चमलियाल पोस्ट के पास बीएसएफ चौकी पर हमले की कोशिश कर रहे तीन आतंकियों को ढेर कर दिया गया।

नगरोटा हमले में पंढरपुर (महाराष्ट्र) निवासी मेजर कुणाल गोसावी, नांदेड़ के लांस नायक संभाजी यशवंत और कांस्टेबल राघवेंद्र कदम शहीद हो गए। आतंकियों ने तड़के जम्मू शहर के बाहर सैन्य मुख्यालय से तीन किलोमीटर दूर 166 आर्टिलरी यूनिट पर धावा बोला। सबसे पहले संतरी को गोली मारने के बाद यूनिट में दाखिल हुए। आतंकियों ने आफिसर मेस के दो भवनों को कब्जे में ले लिया जिसमें 12 जवान, 2 महिलाएं और 2 बच्चे थे।

बंधकों को छुड़ाने में एक मेजर और दो जवान शहीद हुए जबकि दूसरे मेजर और तीन जवान आतंकी हमले में शहीद हुए हैं। घायल सूबेदार प्रहलाद सिंह, हवलदार कोशक चौधरी व सिपाही तरसेम सिंह को मिलिट्री हास्पिटल सतवारी शिफ्ट किया गया। आतंकियों के निशाने पर नगरोटा सैन्य मुख्यालय का आयुध भंडार था। सेना को ऑपरेशन पूरा करने में भी लगभग दस घंटे लग गए।

सैन्य प्रवक्ता ने बताया कि सभी बंधकों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया है। घने अंधेरे के कारण ऑपरेशन रोक दिया गया है। बुधवार सुबह फिर से ऑपरेशन शुरू किया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर रात 12.30 बजे घुसपैठ हुई थी जबकि नगरोटा मुख्यालय पर सुबह लगभग 5 बजे हमला हुआ। हमलों के बाद सूबे में हाई अलर्ट कर दिया गया है। कटड़ा में माता वैष्णो देवी मंदिर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

आतंकियों को मार गिराने के लिए पैरा कमांडो भी बुलाए गए। ड्रोन तथा हेलीकाप्टर से आतंकियों के लोकेशन का पता लगाया जाता रहा। हमले के बाद नगरोटा इलाके के सभी स्कूल बंद करा दिए गए। दुकानदारों ने पाकिस्तान के खिलाफ दुकानें बंद कर विरोध प्रदर्शन किया।

उधर, सांबा जिला के रामगढ़ सेक्टर के अग्रिम पोस्ट फतोबाल में मंगलवार सुबह आतंकियों और बीएसएफ के बीच मुठभेड़ में तीन आतंकी ढेर किए गए। रामगढ़ की अग्रिम पोस्ट चमलियाल और फतोबाल के मध्य एक नाले एवं सरकंडे की आड़ में तीन आतंकी बीती रात 12.30 बजे ही जीरो लाइन से तारबंदी पार कर एक ट्यूबवेल के कमरे में घुस आए थे। बीएसएफ के सतर्क जवानों ने इलाके को घेर लिया। सुबह होते ही उन्होंने कार्रवाई शुरू की तो आतंकियों ने गोलाबारी शुरू कर दी। इसमें एक जवान घायल हो गया।

आतंकियों को घिरा देख पाक रेंजरों ने मोर्टार दागने शुरू कर दिए। बीएसएफ ने भी इसका जवाब दिया। इसमें तीन आतंकी मार गिराए गए। मुठभेड़ खत्म होने के बाद तलाशी अभियान शुरू किया गया तो एक आतंकी की बेल्ट में बंधे आईडी में धमाका हो गया। इसमें बीएसएफ के डीआईजी वी एस कसाना, पुलिस के फिदायीन दस्ते के इंस्पेक्टर सर्वजीत सिंह, बीएसएफ के एसआई ओम प्रकाश, परस राम, मुकेश चौधरी, विकास वतियाल, के बी कुमार, शाम लाल घायल हो गए।

नगरोटा का हमला उड़ी हमले के बाद दूसरा सबसे बड़ा हमला है। उड़ी में ब्रिगेड मुख्यालय पर हुए हमले में 19 जवान शहीद हो गए थे। नगरोटा में दो अफसरों सहित सात जवान शहीद हो गए। दस घंटे से अधिक समय तक चले ऑपरेशन में सभी तीन फिदायीनों को मार गिराया गया।

मारे गए तीनों आतंकियों के शवों को पोस्टमार्टम के बाद रामगढ़ के कमौर स्थित कब्रिस्तान में दफना दिया गया। मारे गए आतंकियों से तीन एके 47 रायफल, 18 मैगजीन, 457 एके राउंड, 10 एमटी फायर, एक जीपीआरएस, एक पिस्टल, एक पिस्टल मैगजीन, दो हैंड ग्रेनेड, सात आईईडी, दो वायरलेस सेट, सेना की वर्दी तथा बुलेटप्रूफ कैप बरामद हुए हैं।

सेना मुख्यालय पर फिदायीन हमले के तरीके से लगता है कि यह लश्कर-ए- ताइबा की नापाक हरकत है। सेना के सूत्र बताते हैं कि लश्कर इसी तरह के हमले को पहले भी अंजाम देता रहा है। लश्कर के सरगना हाफिज सईद ने भारत से बदला लेने की चेतावनी दी थी। ऑपरेशन पूरा होने के बाद सेना इसकी जांच करेगी कि हमला लश्कर या जैश-ए-मोहम्मद में से किसने किया है। उड़ी हमले में पहले जैश का हाथ होने की आशंका जताई गई थी लेकिन बाद में लश्कर का हाथ होने की पुष्टि हुई थी।

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