चिपको आंदोलन की तरह एक और आंदोलन की है आवश्यकता

प्रदेश में महिला व पर्यावरण का गहरा रिश्ता : डा. नेहा शर्मा

देवभूमि मीडिया ब्यूरो
देहरादून । एक स्थाई वातावरण के लिए महिला उद्योगपति एवं महिला उद्यमि किस तरह से अपना योगदान दे सकती है इस विषय पर त्रिकोण सोसाइटी एवं फिक्की फैलो की ओर से चर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि प्रमुख वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख जयराज मौजूद थे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जयराज ने कहा कि चिपको आंदोलन जब तक उत्तराखण्ड की मजबूत ग्रामीण महिलाओं का चलाया आंदोलन था और आज भी ऐसे ही एक आंदोलन की आवश्यकता है। बल्कि आज भी वर्तमान में स्थायी वातावरण के कारण महिला उद्यमी, महत्वपूर्ण योगदान कर रही है।

इस अवसर पर उन्होंने फिक्की फैलो की सदस्य विद्या शिखा प्रकाश द्वारा किए जा रहे एथिकल पेपर वर्क की भी सराहना की। जो पेंसिल, नोटबुक्स आदि के क्षेत्र में कार्य कर रही है।

कार्यक्रम में वन विभाग एवं फिक्की फलो द्वारा फ्रेंडस विद फॉरेस्ट प्रोजेक्ट पर किए जा रहे कार्य पर भी विस्तार से चर्चा की गई एवं सुझाव मांगे व रखे गए। मौके पर मौजूद साधना जयराज ने कहा चूंकि महिलाएं परिवार और समाज के प्रति बहुत संवेदनशील हैं, इसलिए महिला उद्यमी अपने क्षेत्र में पर्यावरण के बारे में स्वस्थ, जैविक तरीके और पर्यावरण के प्रति जागरूकता पैदा करने का आश्वासन दे सकती हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही त्रिकोण सोसाइटी की चेयरपर्सन एवं फिक्की फलो की ज्वाइंट सक्रेटरी डा. नेहा शर्मा ने कहा कि उत्तराखण्ड में महिला और पर्यावरण का बहुत गहरा रिश्ता रहा है। यहां पर कई आंदोलन इसके गवाह रहे है। आज के इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह है कि जिस तरह से उत्तराखण्ड में महिलाएं पर्यावरण से जुड़ी रही है एवं वन संपदाओं से जुड़ी रही है उसी तरह से आज भी किस प्रकार महिला उद्यमी अपना सहयोग इसे सुरक्षित करने में दे सकती है। यह किसी भी प्रकार से हो सकता है। महिला उद्यमी अपने कार्यालयों में चाहे पेपर का इस्तेमाल कम कर के करें या फिर अपने आस पास अधिक से अधिक पौधरोपण कर करें।

इस अवसर पर फिक्की फलो की चेयरपर्सन नाजिया, सीनियर वाइस चेयरपर्सन किरण भट्ट, कोषाध्यक्ष रुचि जैन, ज्वाइंट कोषाध्यक्ष राशि सिंघल आदि मौजूद थे।

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