मैंने ऊंचे पदों पर आसीन लोगों के भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार संघर्ष किया : संजीव 

उत्तराखंड सरकार के मार्फत लिखा पत्र

देहरादून : भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी अथक लड़ाई का हवाला देते हुए व्हिसलब्लोअर नौकरशाह संजीव चतुर्वेदी ने खुद को लोकपाल की अन्वेषण शाखा में प्रतिनियुक्ति पर भेजे जाने का अनुरोध किया है। दिल्ली स्थित एम्स में मुख्य सतर्कता अधिकारी के तौर पर अपने कार्यकाल में खबरों में रहे चतुर्वेदी ने लोकपाल को पत्र लिखकर उनकी जांच शाखा में सेवा के लिए नियुक्त किए जाने का अनुरोध किया है। नौकरशाह संजीव चतुर्वेदी पहले हरियाणा और उसके बाद दिल्ली एम्स में मुख्य सतर्कता अधिकारी रहते हुए भ्रष्टाचार के कई मामलों को खोलने पर सुर्खियों में आए थे।

वर्ष 2015 में रमन मैग्सैसे पुरूस्कार से नवाज़े गए संजीव चतुर्वेदी 2002 बैच के भारतीय वनसेवा के अधिकारी हैं। उन्होंने उत्तराखंड सरकार के मार्फत लिखे पत्र में कहा कि मैं स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मानित परिवार से आता हूं। मैंने कई तरह की परेशानियों के बावजूद पूरी प्रतिबद्धता से सत्तारूढ़ प्रतिष्ठान के ताकतवर एवं ऊंचे पदों पर आसीन लोगों के भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार संघर्ष किया है।

चतुर्वेदी इस समय उत्तराखंड के हल्द्वानी में वन संरक्षक (अनुसंधान) के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के लिए 2015 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। चतुर्वेदी ने अपने पत्र में उन कुछ मामलों का जिक्र किया है, जिनकी उन्होंने एम्स में मुख्य सतर्कता अधिकारी और हरियाणा में तैनाती के दौरान जांच की थी।

हरियाणा में उनके कार्यकाल के दौरान 2008 से 2014 के बीच उनके पक्ष में राष्ट्रपति के चार आदेश पारित किए गए थे। भ्रष्टाचार के कई मामलों को उजागर करने के लिए उन्हें परेशान किया गया। इसके बाद अगस्त 2015 में उन्हें हरियाणा से उत्तराखंड कैडर में भेज दिया गया था। उन्होंने एम्स में भ्रष्टाचार के करीब 200 मामलों की जांच की थी।

Advertisements