प्रसव पीड़िता को डंडों से बने स्ट्रेचर पर लिटाकर 22 किमी दूर पैदल चलकर पहुँचाया अस्पताल

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  • आपदा और भारी बारिश से सहमे गांव 

थराली : चमोली और बागेश्वर जिले के सीमांत  कुंवारी गांव के सामने भारी वर्षा के चलते आपदा पीड़ितों के सामने संकट पैदा हो गया है, यहाँ  ग्रामीण कई परेशानियों से एक साथ जूझ रहे हैं। इसी परेशानी के चलते बीते दो दिन पहले  ग्रामीणों ने एक गर्भवती को ग्रामीणों ने 22 किलोमीटर दूर गढ़वाल क्षेत्र के देवाल अस्पताल तब पहुंचाया, जब उनके गांव से बागेश्वर तक की सड़क चारों तरफ से बंद हो गयी। लेकिन ग्रामीणों ने प्रकृति के सामने हार नहीं मानी और गर्भवती को ग्रामीण समय रहते उसे अस्पताल पहुंचा लाये। जहाँ महिला का सुरक्षित प्रसव हुआ और जच्चा-बच्चा की जान बच पायी। 

मामला बागेश्वर जिले के कुंवारी गांव का है जो पिछले दो वर्षों से आपदा की मार झेल रहा है। यहां इस साल मार्च से एक और पहाड़ी दरक रही है। बारिश होने के बाद पूरा गांव चारों तरफ से भूस्खलन से घिर गया है। गांव के लोग टेंट या फिर जंगलों में छप्पर बनाकर किसी तरह से जीने की कोशिश कर रहे हैं। शुक्रवार को गांव की गर्भवती अनीता देवी (22) पत्नी मनोज कुमार को प्रसव पीड़ा हुई तो  ऐसे में सड़क से बुरी तरह कट चुके गांव के लोगों को प्रसव पीड़िता को अस्पताल पहुंचाने की सबसे बड़ी चुनौती थी। ग्रामीणों ने लकड़ी के दो डंडे काटकर उसे रस्सियों से बांधा और उसे स्ट्रेचर का रूप दिया। जंगल के बीहड़ रास्तों से 22 किमी पैदल चलने के बाद गढ़वाल के चमोली जिले में देवाल अस्पताल तक प्रसव पीड़िता को पहुंचाया। जहां डॉक्टर ने महिला का सुरक्षित प्रसव कराया और जच्चा-बच्चा की जान बच पायी। 

हालाँकि एक जानकारी के अनुसार बागेश्वर जिला प्रशासन को इस वाकये की खबर ही नहीं है। जबकि स्वास्थ्य विभाग कुंवारी की प्रसव पीड़िताओं को कपकोट अस्पताल लाने का दावा करता रहा है। ग्राम प्रधान किशन दानू ने कहा कि जिला प्रशासन गांव के लोगों की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने बताया कि गांव में कुछ और महिलाएं भी गर्भवती हैं। उन्हें भी समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में उनका सुरक्षित प्रसव कैसे होगा, यह चिंता ग्रामीणों को सता रही है।

डीएम, बागेश्वर रंजना राजगुरु का मामले में कहना है कि गर्भवती महिलाओं को कपकोट शिफ्ट करने के निर्देश दिए गए थे। यदि इसमें गड़बड़ी हुई है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी। गर्भवती महिलाओं के लिए अनटाइड फंड भी रखा गया है। यदि अधिकारी गलत रिपोर्टिंग कर रहे हैं, तो उन पर कार्रवाई होगी।