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-विश्वविद्यालयों में मास कम्यूनिकेशन कोर्स जरूरी : राज्यपाल 
देवभूमि मीडिया ब्यूरो 
देहरादून । राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने सोमवार को देहरादून में आयोजित पब्लिक रिलेशन सोसायटी ऑफ इंडिया की 40वीं राष्ट्रीय कांफ्रेंस के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस कार्यक्रम में वित्त मंत्री प्रकाश पंत भी उपस्थित थे।  
राज्यपाल ने कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को कांफ्रेंस की थीम के अनुरूप गंगा की स्वच्छता की शपथ भी दिलाई। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्रीमती मौर्य ने कहा कि गंगा और हिमालय का संरक्षण समय की मांग है। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क और मीडिया की हिमालय और गंगा संरक्षण में प्रमुख भूमिका है। हिमालय सिर्फ एक पर्वत माला नहीं वरन् भारतीय संस्कृति और सभ्यता का महान केंद्र है। हिमालय के पर्यावरण की चिंता करना पूरे देश का ही नहीं बल्कि विश्व का भी दायित्व है। यह जानकर हैरत होती है कि यूरोपीय देशों द्वारा किया जा रहा प्रदूषण भी हिमालय की जलवायु को नुकसान पहुंचा रहा है। 
राज्यपाल ने कहा कि जनसंपर्क और मीडिया लोक कल्याणकारी राज्य की प्रमुख विशेषता हैं। जन संपर्क जनता की भावनाओं और समस्याओं को जानने का साधन भी है। राज्यपाल ने सभी विश्वविद्यालयों में मास कम्यूनिकेशन कोर्स प्रारंभ करने के पी. आर. एस. आई के सुझाव पर कहा कि वे देखेंगी कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में मास कम्यूनिकेशन कोर्स चलाया जाए और जहां पहले से चलाया जा रहा है उसकी क्या स्थिति है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री श्री प्रकाश पंत ने कहा कि अच्छे जनसंपर्क अधिकारी समाज के ट्रेण्ड को पहचान कर संवाद की दिशा तय करते हैं। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क समाज को जागरूक करने का माध्यम है। हिमालय और गंगा की थीम पर नेशनल कॉन्फ्रेंस आयोजित करना सराहनीय कदम है। समापन सत्र में पी. आर. एस. आई के अखिल भारतीय स्तर के चैप्टर अवार्ड भी प्रदान किए गए।
पी. आर. एस. आई के अध्यक्ष डॉ अजीत पाठक ने देहरादून के लोगों तथा उत्तराखंड चैप्टर को धन्यवाद दिया। डॉ. पाठक ने कहा कि पी. आर. एस. आई हमेशा से जन सरोकारों से जुड़े मुद्दों को उठाती रही है। कार्यक्रम में यूकोस्ट के डी.जी राजेंद्र डोभाल, पी. आर. एस. आई की सचिव निवेदिता बनर्जी, उत्तराखंड चैप्टर के अध्यक्ष विमल डबराल, सचिव अनिल सती, कोषाध्यक्ष सुरेश भट्ट सहित पी. आर. एस. आई के देश के सभी चैप्टरों से आए सदस्य तथा पदाधिकारी, गणमान्य अतिथि आदि उपस्थित थे।
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