स्वयं सेवी संस्था ‘रुलक’ द्वारा दायर है जनहित याचिका

सरकार के संशोधित अधिनियम को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई पूरी 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

नैनीताल : प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को आवास व अन्य सुविधाओं के बकाया माफ करने को लेकर रुलक संस्था द्वारा नैनीताल हाई कोर्ट में दायर सरकार के संशोधित अधिनियम को चुनौती देती याचिका पर सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे की खंडपीठ में देहरादून की स्वयं सेवी संस्था रुलक द्वारा दायर जनहित याचिका में सरकार द्वारा बनाये गए संशोधित अधिनियम को असंवैधानिक करार देते हुए निरस्त करने की मांग की है।

याचिकाकर्ता का कहना है कि जब कोर्ट ने पूर्व में बाजार दर पर किराया वसूलने का आदेश पारित किया था तो विधायिका को अदालत के आदेश को बाईपास करने का कोई अधिकार नहीं है। रूलक संस्था द्वारा जनहित याचिका दायर कर पूर्व मुख्यमंत्रियों से बकाया वसूली के लिए आदेश पारित करने का आग्रह किया गया था। कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों से बाजार दर पर सुविधाओं का बकाया जमा करने के आदेश पारित किए थे। जिसके बाद सरकार द्वारा अध्यादेश पारित कर पूर्व सीएम को राहत दी, फिर अध्यादेश को विधानसभा में पारित कराकर अधिनियम की शक्ल दी जिसमें पूर्व मुख्यमंत्रियों को राहत दी गई।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता  ने बताया है कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को राहत देने वाला यह अधिनियम पूरी तरह असंवैधानिक है और संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार का उल्लंघन है।