हाईकोर्ट में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की प्रार्थना पत्र दाखिल कर प्राथमिकी निरस्त करने की मांग

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

नैनीताल : उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से जुड़े स्टिंग मामले में हाईकोर्ट ने शुक्रवार (आज) होने वाली सुनवाई स्थगित कर दी है। मामले की अगली सुनवाई अब सात जनवरी 2020 को होगी। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त के स्टिंग मामले में दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। रावत ने प्राथमिकी निरस्त करने की मांग की है। जबकि हाई कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

गौरतलब हो कि सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता कपिल सिब्बल हरीश रावत की पैरवी कर रहे हैं। मामले में पूर्व में कोर्ट ने सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने की अनुमति दे दी थी। लेकिन इसी बीच सीबीआई ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित काबीना मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत और स्टिंग करने वाले उमेश कुमार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी थी। जिसके बाद से उत्तराखंड की राजनीती में भूचाल आ गया है। 

शुक्रवार को नैनीताल उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने आज सुनवाई स्थगित करते हुए कोर्ट ने अगली तिथि सात जनवरी 2020 नियत कर दी । वहीं सुनवाई के दौरान पूर्व सीएम रावत ने सीबीआई द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती देते हुए कहा है सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का अधिकार नहीं है। जिस पर कोर्ट ने सीबीआई को इस पर जवाब देने को कहा है। मामले में सीबीआई ने हरीश रावत के साथ ही स्टिंग करने वाले न्यूज चैनल संचालक तथा वन मंत्री डॉ हरक सिंह रावत के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

गौरतलब हो कि वर्ष 2016 में कांग्रेस विधायकों की बगावत का बाद तत्कालीन कांग्रेस की हरीश रावत सरकार का सियासी संकट शुरू हुआ था। स्टिंग मामले की राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्यपाल द्वारा सीबीआई जांच की संस्तुति केंद्र सरकार को भेजी थी। पहले हाईकोर्ट व फिर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से राष्ट्रपति शासन लगाने का आदेश निरस्त हुआ और बर्खास्त रावत सरकार बहाल हुई तो मुख्यमंत्री की गैरमौजूदगी में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री इंदिरा हृदयेश की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में स्टिंग मामले की सीबीआई से जांच हटाकर एसआइटी जांच कराने का फैसला लिया। इस फैसले को डॉ हरक सिंह रावत ने चुनौती दी थी।

इससे पहले की सुनवाई में सीबीआई की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया था कि वह इस मामले में हरीश रावत के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने जा रही है। इस पर हरीश रावत ने सीबीआई की ओर से इस मामले में जांच करने के अधिकार को चुनौती दी हुई है।

मामले में एकलपीठ ने सीबीआई की रिपोर्ट पर कहा था कि उसके समक्ष मुख्य विचारणीय विषय 31 मार्च 2016 के सीबीआई जांच के राज्यपाल के आदेश, 2 फरवरी के अध्यादेश और 15 मई 2016 के राज्य सरकार द्वारा सीबीआई के बजाय एसआईटी से जांच के आदेश की वैधता की जांच करना है। वहीं कोर्ट ने कहा था कि सीबीआई इस मामले में एफआईआर दर्ज करने को स्वतंत्र है और जांच शुरू कर सकती है, लेकिन अग्रिम कार्यवाही न्यायालय के अंतिम आदेश पर आधारित होगी।

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