हरकी पैड़ी पर गंगा की धाराः सियासत में हरीश रावत से पीछे नहीं हैं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत

कांग्रेस ने हरकी पैड़ी पर गंगा की अविरल धारा को बताया था स्कैप चैनल

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सरकार ”हरकी पैड़ी” को स्कैप चैनल बताने वाला शासनादेश करने जा रही है निरस्त !

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के सियासी दांव का उन्हीं के अंदाज में जवाब देने की तैयारी में सरकार

हरकी पैड़ी का महत्व भी बना रहेगा और ध्वस्तीकरण की सीमा में भी नहीं आएंगे कई भवन

देवभूमि मीडिया ब्यूरो

कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव पूर्व सीएम हरीश रावत का सरकार पर पलटवार

‘हर की पैड़ी” पर गंगा को स्कैप चैनल के मुद्दे पर खुद पर सवाल उठने पर कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव पूर्व सीएम हरीश रावत ने सरकार पर पलटवार किया है। हरदा ने कहा कि, मेरे फैसले पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। लेकिन, पिछले साढ़े तीन साल से तो प्रदेश में भाजपा ही सरकार है। ऐसे में मां गंगा को लेकर सरकार का अब क्या प्रायश्चित होगा ?उन्होंने कहा बिल्डरों को साढे तीन साल तक फायदा पहुंचाने के लिए तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत को प्रदेश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
हालांकि स्कैप चैनल के आदेश को अपनी गलती मानते हुए पूर्व सीएम ने इसे निरस्त करने की पैरवी की है। वहीं सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हरदा के इस बयान को उनका प्रायश्चित बताया था। वहीं हरदा ने भाजपा अध्यक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को तो खुद प्रदेश की जनता से माफी मांगनी चाहिए।
देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के दांव सबसे ज्यादा हलचल पैदा करने वाले होते हैं। कहा जाता है कि सियासत करना तो कोई उनसे सीखे। सियासत करने का उनका अपना अंदाज है। पर इस बार उनको अपनी सियासी चाल का मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से करारा जवाब मिलने वाला है। 
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार त्रिवेंद्र सरकार, हरकी पैड़ी पर गंगा की अविरल धारा को स्कैप चैनल घोषित करने के पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के फैसले को निरस्त करने की तैयारी कर रही है। ऐसा करके सरकार न केवल गंगा सभा, अखाड़ों और तीर्थ पुरोहितों की मांग पूरा करेगी बल्कि हरीश रावत को सियासी जवाब देने की तैयारी भी कर चुकी है। वहीं दूसरी तरफ, गंगा को स्कैप चैनल घोषित करने के फैसले पर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के माफी मांगने को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने हरदा का प्रायश्चित करार दिया। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि मां गंगा उन्हें माफ करें।
गौरतलब हो कि हरकी पैड़ी से मां गंगा का प्रवाह होता है या गंगनहर का प्रवाह होता है, यह वर्षों पुराना मुद्दा है और इस पर पक्ष और विपक्ष की सियासत कोई नई नहीं है। कुछ दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस मुद्दे को हवा देते हुए सियासत में हलचल पैदा कर दी। उनके इस राजनीतिक दांव से उत्तराखंड सरकार के सामने अजीब सा संकट पैदा हो गया।
पूर्व सीएम रावत ने अखाड़ा परिषद को दिए एक पत्र में कहा कि एनजीटी ने गंगा तट से 200 मीटर के दायरे में निर्माण ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। इससे हरिद्वार में बहुत सारे भवनों पर ध्वस्त होने का संकट आ गया था। इससे बचाव का रास्ता निकालने की मांग की जाने लगी। उस समय मेरी सरकार ने फैसला किया कि इन भवनों को बचाने के लिए मां गंगा के प्रवाह को एक तकनीकी नाम (गंगनहर) दे दिया जाए।
पत्र में पूर्व सीएम रावत ने बताया कि इस आदेश से ध्वस्तीकरण तो रुक गया, लेकिन एक भावनात्मक गलती हो गई। मां गंगा जहां भी, जिस रूप में हैं, वो गंगा ही हैं। हरकी पैड़ी पर मां गंगा अपने पूर्ण स्वरूप में प्रवाहमान हैं। सरकारों के निर्णय को आने वाली सरकारें बदलती रहती है। यदि आज की सरकार उस वक्त की मेरी सरकार के फैसले को बदलती है तो उन्हें खुशी होगी।
पूर्व सीएम ने अपने इस पत्र में जहां अपनी गलती स्वीकार की, वहीं उन्होंने सियासी दांव खेलकर अपनी वाहवाही कराने का अवसर तलाश लिया और वर्तमान सरकार के सामने संकट की स्थिति पैदा कर दी। अगर सरकार पूर्व के आदेश को बदलती है तो उसको उन लोगों की नाराजगी का सामना करना पड़ेगा, जिनके भवन ध्वस्तीकरण की सीमा में आ रहे हैं। अगर सरकार नाम नहीं बदलती तो महाकुंभ के समय संतों और पुरोहितों की नाराजगी को झेलना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी पूर्व सीएम हरीश रावत से दो कदम आगे की सियासत करते हैं। प्रदेश सरकार हरीश रावत के सियासी दांव का उन्हीं के अंदाज में जवाब देने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार की कोशिश है कि हरकी पैड़ी पर मां गंगा के प्रवाह को गंगा धारा नाम दिया जाए। 
एक कैबिनेट मिनिस्टर ने मीडिया से बात करते हुए इस बात के संकेत दिए हैं कि कोशिश यह हो रही है कि गंग नहर का नाम एक फिर गंगा करके हरकी पैड़ी के महत्व को बनाए रखा जाए, साथ ही ध्वस्तीकरण की जद में आ रहे भवनों को भी बचा लिया जाए। इसे कहते हैं सही समय पर सही जवाब देना कि फिर से कोई सियासत करने की सोचे भी नहीं।