देहरादून : उत्तराखंड के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत एक हजार से ज्यादा शिक्षा मित्रों को आखिरकार मानदेय में वृद्धि की सौगात मिली है। सरकार ने प्रतिमाह 2000 रुपये मानदेय बढ़ाने का आदेश जारी कर दिया है। शिक्षा मित्रों को अब प्रति माह 15 हजार रुपये मानदेय मिलेगा। उधर, न्याय महकमे के परामर्श के बाद शिक्षा मित्रों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ शिक्षा महकमा विशेष अपील दायर करेगा।

शिक्षा मित्रों को मानदेय में वृद्धि के लिए ढाई माह लंबा इंतजार करना पड़ा है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शिक्षा मित्रों का मानदेय 2000 रुपये बढ़ाने के शिक्षा महकमे के प्रस्ताव को बीते सितंबर माह के पहले पखवाड़े में ही अनुमोदित कर दिया था।

गौरतलब हो कि प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में वर्तमान में 1045 शिक्षा मित्र कार्यरत हैं। इन्हें 13 हजार रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा था। शिक्षा मित्र मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर लंबे अरसे से आंदोलनरत रहे हैं। शिक्षा मित्र संगठन की मांग है कि प्रति माह मानदेय को बढ़ाकर 25 हजार रुपये किया जाए। अपर मुख्य सचिव शिक्षा डॉ. रणबीर सिंह ने आदेश जारी कर शिक्षा मित्रों के मानदेय में 2000 रुपये की वृद्धि कर दी है।

उल्लेखनीय है कि प्रदेश में अधिकतर शिक्षा मित्रों को प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के रूप में समायोजित किया जा चुका है। अब महज 1045 शिक्षा मित्र ही नियमित होने से वंचित हैं। इन्हें दो वर्षीय डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

उधर, सरकार शिक्षा मित्रों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने के हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ विशेष अपील करेगी। हाईकोर्ट ने बीते दिनों आदेश जारी कर शिक्षा मित्रों के लिए टीईटी पास होना अनिवार्य किया था। इससे डीएलएड का प्रशिक्षण ले रहे शिक्षा मित्रों में खलबली मची हुई है। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ विशेष अपील के लिए न्याय महकमे से परामर्श मांगा गया था। न्याय ने विशेष अपील के लिए भेजे गए प्रस्ताव पर रजामंदी दी है।

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