सीएम त्रिवेंद्र रावत के ऐतिहासिक फैसले ने उड़ाई विरोधियों की नींद

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गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने का राज्यभर में व्यापक समर्थन
राज्य आंदोलनकारियों ने किया सीएम के फैसले का स्वागत

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

गैरसैंण में सुविधाएं जुटाने की तैयारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के घोषणापत्र में किए गए वायदे को पूरा किया गया है।उत्तराखंड पर्वतीय राज्य है, पहाड़ में राजधानी यहां के लोगों का सपना रहा है, इसके लिए संघर्ष भी किया है। इन्हीं जनभावनाओं का सम्मान करते हुए गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया है। इस घोषणा को मैं राज्य निर्माण के लिए कुर्बान हुए तमाम शहीदों और आंदोलनकारियों को समर्पित करता हूं। उत्तराखंड एक सीमान्त राज्य होने के कारण सामरिक दृष्टि से अति महत्वपूर्ण और आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील है।

इन्ही बातों और प्रदेश की जनता की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। अब आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी।

यहां तमाम आवश्यक सुविधाएं विकसित की जानी हैं। गैरसैण में पानी की समस्या को दूर करने के लिए पहले से ही झील बनाए जाने पर काम किया जा रहा है।

देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करके अपने विरोधियों को करारा जवाब दिया है। मुख्यमंत्री ने इस ऐतिसाहिक फैसले को राज्य आंदोलनकारियों, माताओं- बहनों को समर्पित किया है। मुख्यमंत्री के इस फैसले का राज्यभर में स्वागत किया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत गैरसैंण में चल रहे बजट सत्र के दौरान बड़ी घोषणा करके राज्य आंदोलनकारियों से किए वादे पर खरे उतरे हैं। इस फैसले को राज्य आंदोलनकारियों के सपने का उत्तराखंड बनने की ओर बड़ा कदम माना जा रहा है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने गैरसैंण को प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की घोषणा को एक ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री को बधाई दी है। उन्होंने बजट को सर्वस्पर्शी बताते हुए कहा कि यह प्रदेश के विकास के रोडमैप को प्रदर्शित करता है।

बुधवार को एक बयान में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री ने यह घोषणा कर पार्टी के विधानसभा चुनाव के समय जनता से अपने दृष्टि पत्र में किए गए वादे को पूरा किया है। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने से पर्वतीय इलाकों का विकास तेजी से होगा। यह भाजपा की प्रदेश के सर्वागीण विकास की अवधारणा को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। 

भाजपा के बद्रीनाथ विधानसभा के विधायक महेंद्र प्रसाद भट्ट ने कहा आज मेरी सभी महत्वकांक्षा पूर्ण हो गयी।मेरे पास प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी के लिए धन्यवाद के लिए शब्द नही है, आज सिद्ध हो गया कि त्रिवेंद्र रावत उत्तराखंड का सच्चा बेटा हैं। मैं भी राज्य आंदोलन के लिए 5 दिन पौड़ी जेल में रहा।आज मेरा सपना पूर्ण हो गया।जब मै मुख्यमंत्री जी से दिल्ली में मिला तो मैने त्रिवेंद्र जी के दिल को समझा और कुछ बाते विश्वास पूर्वक साझा की। मैं भी डरा था,पर भाई को बचपन से जानता था,पूरा विश्वास था।त्रिवेंद्र जी जैसा नेता ही उत्तराखंड का हितैसी हैं।जो लोग आज गैरसेंण को स्थायी राजधानी की बात कर रहे है, वे गैरसेंण में कुछ चाहते नही थे।वे पिछले 20 साल से केवल राजनीति करने में ही लगे थे।त्रिवेंद्र जी आप उत्तराखंड के लिए सदैव प्रभावी निर्णय करता के रूप में राज्य के दिलो में राज करने वालो में सम्लित हो गये हैं।

उत्तराखंड आंदोलन के तत्कालीन संयुक्त छात्र संगठन के केंद्रीय संयोजक रहे विनोद रावत ने त्रिवेंद्र रावत की घोषणा का स्वागत करते हुए इसको राज्य आंदोलनकारियों की भावनाओं का सम्मान बताया।

उन्होंने कहा राज्य गठन के साथ ही गैरसैंण को उत्तराखंड की राजधानी बनाने की मांग उठाई जा रही है। त्रिवेंद्र सरकार के इस कदम से उनके विरोधियों को बड़ा झटका लगा है। इस निर्णय से सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को भारी समर्थन मिल रहा है। वहीं राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अफवाह उड़ाने वालों को भी जवाब मिल गया है।

सोशल मीडिया पर प्रायः अपने विचार रखने वाले और पलायन एक चिंतन से जुड़े रतन सिंह असवाल का कहना है कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाये जाने का त्रिवेंद्र सरकार का फैसला इस मायने से काफी साहसिक माना जा सकता है कि इस प्रदेश की पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा ऐसा फैसला लेने में जोखिम की आशंका देख अपने कदम आगे नही बढ़ाये गए। निसंदेह यह कदम गैरसैंण के स्थायी राजधानी बनने की बुनियाद साबित होगा। उम्मीद की जानी चाहिए कि बहुत शीघ्र इस कदम पर सकारात्मकता से बढ़ते हुए एक दिन गैरसैंण इस प्रदेश की स्थायी राजधानी बनेगी।

त्रिवेंद्र सरकार के इस कदम की दलगत राजनीति से उठकर सराहना की जानी चाहिए, जिससे सरकार को गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के संभावित फैसले को लेने में दोगुना उत्साह व ऊर्जा मिल सके।