गैरसैण । विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुुंजवाल ने वर्तमान सरकार के आखरी सत्र के समापन्न अवसर पर सदन को संबोध्ति करते हुए कहा कि हमारे लिए गौरव का पल है कि हम उत्तराखण्डियों की जनभावनाओं का केन्द्र गैरसैण में सत्रा आयोजित कर रहे हैं।

उन्होेंने अपने पांच साल के अनुभवों का साझा करते हुए खट्टी-मीठी यादों को स्मरण किया। उन्होंने कहा कि 18 मई 2014 को देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने सदन को संबोध्ति किया था जो उत्तराखण्ड के इतिहास में और संसदीय परपराओं में सुनहरे अक्षरों में लिखा जायेगा।

उन्होंने 18 मार्च 2016 की घटना को भी याद किया और कहा कि संकट के दौर से निकलकर अब विकास की और कदम बढ़ गये हैं। कुछ परेशानियां जरूर आई। दल-बदल के चलते कुछ सदस्यों को सदन से बर्खास्त भी किया गया। सभी संवैधनिक परंपराओं को निर्वाहन करते हुए पीठ ने अपना सर्वाश्रेष्ठ काम करने का प्रयास किया।

उन्होंने राज्यपाल, नेता सदन, नेता प्रतिपक्ष, मंत्रियों, विधयकों, विधनसभा अध्किारियों, मीड़ियाकर्मीयो और प्रशासनिक ईकाईयों के अध्किारियों को आभार प्रकट किया। इस दौरान नेता सदन हरीश रावत ने भी विधनसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल का अपनी व पूरे सदन की ओर से आभार प्रकट करते हुए कहा कि कुछ चुनौतियां भी थी आपके मार्ग दर्शन से सब का सामना किया आपने आपदा और 18 मार्च की घटना से बिना बिचलित हुए सदन को उच्चतम स्तर पर पहुंचाया। इसके साथ ही संसदीय कार्य मंत्राी के प्रस्ताव पर स्पीकर ने अनिश्चित काल के लिए सदन का स्थगित कर दिया।

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