आरके गुप्ता के नीरज क्लीनिक में एक बार तीसरी बार फिर ड्रग कंट्रोलर का छापा

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सात घंटे दिल्ली और देहरादून की संयुक्त टीम ने की गहन जांच

दस्तावेज और बिना रैपर की दवा कब्जे में लिए

ऋषिकेश: मिर्गी रोग विशेषज्ञ का दावा करने वाले आरके गुप्ता के नीरज क्लीनिक में औषधि नियंत्रण विभाग की टीम ने एक आर फिर छापा मारकर बिना रैपर की आयुर्वेदिक और एलोपैथिक दवा बरामद की है। करीब सात घंटे चली कार्रवाई में टीम ने दस्तावेज कब्जे में लिए हैं। छापेमारी के दौरान नीरज क्लीनिक का मुख्य डॉक्टर भागने में सफल रहा। मिर्गी का शर्तिया इलाज करने का दावा करने वाले नीरज क्लिनिक के कर्ता धर्ता ‘डॉक्टर’ नीरज गुप्ता अभी ज़मानत पर हैं। 

गौरतलब हो कि इस छापे से पहले वर्ष 2004 में पूर्व मुख्यमंत्री एन डी तिवारी वाली सरकार के दौरान जब तिलक राज बेहड़ स्वास्थ्य मंत्री थे छापा पड़ा था और डॉ.आर के गुप्ता को काफी समय तक जेल की हवा भी खानी पड़ी थी और उन्हें पांच साल की जेल हुई थी । ऋषिकेश पुलिस की हिरासत से फरार होने के बाद 14 अगस्त को क्लेमेंटटाउन पुलिस ने डॉ.आरके गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया था। डॉ.गुप्ता ने करीब 27 माह कारागार में गुजारे थे। उस दौरान मिर्गी रोग के इलाज करने वाले कथित डॉक्टर गुप्ता की बमुश्किल ही जमानत हो पाई थी। जेल से बाहर आने के बाद नीरज गुप्ता ने ऋषिकेश-हरिद्वार मार्ग पर फिर से नीरज क्लीनिक के नाम पर मिर्गी  का इलाज करना शुरू कर दिया।  इस बार उन्होंने कुछ बीएमएस और एमबीबीएस डॉक्टरों को नियुक्त किया था और इलाज क्लिनिक चलाना शुरु कर दिया था।  अब एक बार फिर नीरज क्लिनिक पर छापे से ऋषिकेश शहर वासियों की यादें एक बार फिर ताजा हुई हैं और कथित डॉक्टर एक बार फिर चर्चाओं में हैं।  

बुधवार की दोपहर करीब एक बजे औषधि नियंत्रण विभाग की टीम ने आरके गुप्ता के हरिद्वार रोड स्थित नीरज क्लीनिक में छापा मारा। केंद्र और राज्य स्तर की टीम में शामिल सदस्यों ने क्लीनिक परिसर में मौजूद सभी अधिकारी और कर्मचारियों को गेट से बाहर जाने से मना कर दिया। तहसीलदार रेखा आर्य और नायब तहसीलदार करण सिंह के साथ पुलिस फोर्स लेकर पहुंची औषधि नियंत्रक की टीम ने दो मंजिला भवन के सभी कमरों की बारीकी से जांच की। क्लीनिक निदेशक, पूर्व निदेशक के कार्यालय को सील कर दिया गया। टीम के सदस्यों ने यहां तैनात चिकित्सक डॉ. शुभा के अतिरिक्त निदेशक डॉ. वीके गुप्ता और अन्य लोगों से पूछताछ की। टीम ने क्लीनिक के मेडिकल स्टोर के अतिरिक्त अन्य कमरों में रखी दवा कब्जे में ली। कार्रवाई के दौरान क्लीनिक के स्वामी आरके गुप्ता और वहां के मुख्य अधिकारी हर्ष साहनी यहां मौजूद नहीं थे। जिससे काम करने वाले सभी कर्मचारियों में पूरे समय खलबली और बेचैनी नजर आई। टीम ने क्लीनिक से एलोपैथिक और आयुर्वेदिक दवा कब्जे में ली हैं। इन दवाओं में कोई रेपर नहीं थे। इसके साथ ही टीम ने क्लीनिक के कार्यालय में मिले बड़ी संख्या में पोस्ट ऑफिस के बीपी व अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में लिए।

कार्रवाई में शामिल देहरादून के औषधि नियंत्रक और लाइसेंस अथॉरिटी गढ़वाल मंडल सुरेंद्र सिंह भंडारी ने बताया कि क्लीनिक के पास दवा का लाइसेंस है। मगर लाइसेंस शर्तो के मुताबिक यहां एलोपैथिक और आयुर्वेदिक दवाएं बड़ी मात्र में बिना रैपर के बरामद हुई हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अगस्त माह में भी यहां क्लीनिक एक्ट के तहत जांच की गई थी। बुधवार को हुई कार्रवाई में बरामद दवा के नमूने जांच के लिए लैब में भेजे जाएंगे। जांच पूरी हो जाने के बाद इस मामले में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि केंद्रीय कार्यालय गाजियाबाद में भी क्लीनिक को लेकर शिकायतें मिल रही थी। जिसे देखते हुए केंद्र और राज्य की टीम ने यह कार्रवाई की है। भंडारी ने बताया कि जांच के दौरान क्लीनिक स्वामी आरके गुप्ता को कर्मचारियों के जरिए बुलवाया गया था, मगर यह जानकारी दी कि वह यहां उपलब्ध नहीं है।

कार्रवाई में केंद्रीय औषधि नियंत्रक गाजियाबाद देवेंद्र नाथ पांडे, दिलीप कुमार, औषधि नियंत्रक देहरादून नीरज कुमार, उधम सिंह नगर डॉ. सुधीर कुमार शामिल रहे। वहीं, नीरज क्लीनिक की ओर से मौजूद अधिकारियों ने इस संबंध में कुछ भी कहने से इनकार किया।