विश्व के दस श्रेष्ठ अधिकारियों में उत्तराखंड काडर के IAS अधिकारी डॉ. राकेश कुमार

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लंदन स्कूल ने चुना आईएएस  डॉ. राकेश कुमार को विशिष्ट प्रशिक्षण के लिए 

विशिष्ट प्रशिक्षण के लिए चुना जाना उत्तराखंड के लिए सम्मान की बात : सीएम 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : उत्तराखंड काडर के स्वच्छ प्रशासनिक क्षमता देने वाले आईएएस अधिकारियों में शुमार और वर्तमान में यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम के एडिशनल कंट्री डायरेक्टर डॉ. राकेश कुमार को लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रोपिकल मेडिसिन ने विश्व के दस सर्वश्रेष्ठ सिविल अधिकारियों में से चुना है। उनके ग्लोबल हेल्थ लीडरशिप प्रोग्राम के  विशिष्ट प्रशिक्षण के लिए चुना जाने पर प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इसे उत्तराखंड के लिए सम्मान की बात कहा है। उन्होंने कहा डॉ. राकेश कुमार से प्रदेश के अन्य अधिकारीयों को प्रेरणा मिलेगी। डॉ. राकेश कुमार देहरादून सहित नैनीताल जिलों के जिलाधिकारी के साथ ही राज्य में कई महत्वपूर्ण विभागों के सचिव रहे हैं और वर्तमान में केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर हैं। 

इतना ही नहीं साफ़ छवि और कर्मठ अधिकारियों में शुमार IAS अधिकारी डॉ. राकेश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में भारत में किये उल्लेखनीय कार्यों को देखते हुए बिल गेट्स फाउंडेशन ने उन्हें इस प्रशिक्षण के लिए आर्थिक मदद की है। डॉ. राकेश वर्तमान में यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम के एडिशनल कंट्री डायरेक्टर हैं। डॉ. कुमार ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत उनकी लंदन में ट्रेनिंग हुई और अब जेनेवा और केपटाउन में भी प्रशिक्षण होना बाकी है। उन्हें बताया उन्हें टीकाकरण पर उच्चस्तरीय शोध का प्रोजेक्ट भी करना है। उल्लेखनीय है कि डॉ.राकेश कुमार आईएएस में सेलेक्ट होने से पहले MBBS की डिग्री प्राप्त कर चिकित्सक का कार्य भी कर चुके हैं।

डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि विश्वभर से इस कार्यक्रम के लिए कई हजार लोगों ने आवेदन किया था। हालांकि उन्होंने आवेदन नहीं किया, किंतु टीकाकरण और सामाजिक स्वास्थ्य पर भारत में किये गए उनके कार्यों का स्वत: संज्ञान लेकर लंदन स्कूल ने उन्हें इसके लिए चुना और गेट्स फाउंडेशन ने फंडिंग भी की।

स्वास्थ्य में सुधार के प्रति अपनी लगन के चलते वे डीएम रहने के दौरान भी नियमित रूप से मरीजों का ऑपरेशन किया करते थे। नैनीताल में स्वास्थ्य और स्वच्छता को लेकर भी उन्होंने अभियान चलाए। बाद में वे शासन में सचिव रहने के बाद केंद्र सरकार में चले गए गए थे। वर्ष 2015 में बच्चों के टीकाकरण संबंधी अभियान मिशन इंद्रधनुष की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सराहना की थी। अब उनके इस प्रशिक्षण और शोध प्रोजेक्ट का लाभ भारत को भी मिलेगा।