गरीबों का हक मार रहे डीलर और खाद्य पूर्ति निरीक्षक

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ठेके पर चल रही भाबर में सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानें
अधिकारियों की नहीं सुन रहे डीलर
पूर्ति निरीक्षक की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में
ग्रामीणों ने की पूर्ति निरीक्षक को हटाने की मांग
काशीरामपुर में सरकारी राशन बिक रहा डीलर की निजी दुकान में
नजीबाबाद में बिक रहा कोटद्वार का सरकारी राशन और कैरोसिन

अवनीश अग्निहोत्री
कोटद्वार। आम जनता को मंहगाई से राहत दिलाने के लिए जहां एक ओर केंद्र व राज्य सरकार अपनी ओर से खाद्य सुरक्षा योजना के तहत राशन उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र के सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से आम जनता को राशन तक उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। स्थिति यह है कि सरकारी सस्ते गल्ले से राशन की कालाबाजारी खुलेआम हो रही है। खाद्य पूर्ति निरीक्षक भी सुबह से शाम तक तहसील स्थित अपने सरकारी कार्यालय में कुर्सी तोड़ते नजर आते है। आलम यह है कि सरकारी सस्ते गल्लों के स्टाॅक का निरीक्षण तक नहीं हो रहा है। ऐसे में आम जनता जाए तो कहां जाए।

बताते चलें कि आजादी के बाद 1948 में बंगाल में भयंकर अकाल पड़ गया था, जिससे हाहाकार मच गया केंद्र सरकार ने जनता को राहत देने के लिए सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों को खोला। इसके बाद इसे पूरे देश में लागू कर दिया गया। सरकार द्वारा बीपीएल कार्ड धारक, एपीएल कार्ड धारक का मानक तय किया। इसके अलावा गरीबों को राहत देने के लिए अन्नपूर्णा खाद्य योजना, अन्त्योदय खाद्य योजना, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना, राज्य खाद्य सुरक्षा योजना सहित तमाम योजनाएं लागू कर जनता को सस्ते दामों पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है, लेकिन बावजूद इसके भी गरीबों को भरपेट खाद्यान्न नहीं मिल पा रहा है। दरअसल सरकारी योजनाओं के तहत सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में पहुंचने वाला राशन गरीबों तक पहुंचने के बजाय कालाबाजारी हो रही है। दरअसल सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में राशन आने से पहले ही बाजार में पहुंच जा रहा है। स्थिति यह है कि सरकारी सस्ते गल्ला विक्रेता की आटा चक्की की दुकानों के सांठ-गांठ रहती है और गोदाम से राशन उठाने के बाद कुछ बोरियां रास्ते में ही आटा चक्की विक्रेता को दे दी जाती है। इसके अलावा राशन कार्ड धारक को पूरी राशन न देने, राशन कार्ड खोने पर राशन कार्ड बनने तक बिना राशन कार्ड के राशन न देने की बात कहकर अन्य लोगों को मंहगे दामों पर बेच देना। इसके अलावा कई लोग सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से राशन नहीं उठाते हैं तो महीने के अंत के बाद से बाजार में बेच दिया जाता है।

सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों से सरकारी राशन की कालाबाजारी न हो इसके लिए खाद्य पूर्ति निरीक्षक की तैनाती की गई है, लेकिन खाद्य पूर्ति निरीक्षक भी सारे दिन कार्यालय में कुर्सी तोड़ते नजर आते है, जब कभी इनकी शिकायत की जाती है तो उप जिलाधिकारी के निर्देश पर साल में एक आद बार ही सरकारी सस्ते गल्लों की दुकानों का निरीक्षण किया जाता है। ऐसे में गरीबों को भरपेट खाना कहां से मिल पाएगा यह सोचनीय विषय है। सरकार को चाहिए कि सरकारी राशन का वितरण सही ढंग से करवाया जाए। इसके अलावा सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों का समय≤ पर निरीक्षण कराया जाना चाहिए।

काशीरामपुर में डीलर की निजी दुकान में बिक रहा सरकारी राशन
कोटद्वार। कोटद्वार तहसील के अंतर्गत लगभग 94 सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानें है, जिसमें से 18 सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानें शहरी क्षेत्र में है, जबकि 76 सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानें ग्रामीण क्षेत्र में हैं, लेकिन इन सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों में सरकारी राशन का वितरण सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। अभी हाल ही में चक्की मोहल्ला काशीरामपुर तल्ला स्थित सरकारी सस्ते गल्ला विक्रेता ने तो सरकारी सस्ता गल्ला की दुकान से अटैच प्रचून की दुकान तक खोलरखी है।

इस सरकारी सस्ता गल्ला की दुकान के एक कार्ड धारक शांति नेगी ने बताया कि विगत महीने वह सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान में राशन लेने गई राशन लेने के दौरान राशन कार्ड दुकान में ही छूट गया, कुछ दिन बाद जब वह राशन कार्ड के लिए सरकारी सस्ता गला की दुकान में पहुंची तो विक्रेता ने राशन कार्ड दुकान में न छूटने की बात कही। शांति नेगी ने बताया कि उसके पास राशन कार्ड की फोटो कापी थी और वह इसको लेकर पंचायत मंत्री नवीन सैनी के पास पहुंची जहां पंचायत मंत्री ने राशन कार्ड की फोटो कापी को हस्ताक्षर व मुहर लगाकर दे दिया और कहा कि इससे राशन मिलने की बात कही। साथ ही जल्द ही नया राशन कार्ड बनवाने की सलाह भी दी।

शांति ने बताया कि जब वह राशन कार्ड की फोटो कापी लेकर सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान में पहुंची तो डीलर ने राशन कार्ड की फोटो कापी पटक कर राशन देने से मना कर दिया साथ ही ग्राहकों के सामने ही उनसे बदसलूकी करते हुए उन्हें भगा दिया। सूत्रों की माने तो राशन कार्ड धारकों की एक ओर जहां डीलर राशन देने से मना कर देता है, वहीं दूसरी ओर आरोप है कि डीलर द्वारा सरकारी राशन को नजीबाबाद के एक व्यकित को सरकारी राशन बेचा जा रहा है। इसके अलावा कैरोसिन भी मंहगे दामों में नजीबाबाद के एक व्यक्ति को बेचा जाता है।

यहां यह भी बताते चलें कि सरकारी सस्ता गल्ला दुकानों में जिन कार्ड धरकों के पास एलपीजी कनेक्शन नहीं है उनके लिए कैरोसिन दिया जाता है, लेकिन अमूमन कार्ड धारकों का आरोप है कि डीलर द्वारा उन्हें कैरोसिन दिया ही नहीं जाता है। मोटाढांक, देवरामपुर, शिवराजपुर, निम्बूचैड़, घमंडपुर आदि क्षेत्रों में ठेकों पर दी गई है। स्थिति यह है कि ऐसे व्यक्ति सरकारी सस्ते गल्ले की दुकानों का संचालन कर रहे है, जो न तो डीलर के परिवार के सदस्य ही है और न ही रिश्तेदार। इस संबंध में ग्रामीणों द्वारा समय-समय  पर उपजिलाधिकारी व खाद्य पूर्ति निरीक्षक को लिखित रूप में सूचित किया गया, लेकिन बावजूद इसके अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।

पूर्ति निरीक्षक को हटाने की मांग
कोटद्वार। कोटद्वार में पूर्ति निरीक्षक कार्यालय होने के बावजूद क्षेत्र में सरकारी राशन की कालाबाजारी और सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं की मनमानी से पूर्ति निरीक्षक अधिकारी की कार्यप्रणाली संदेह के घेरे में है। दरअसल पूर्ति निरीक्षक अधिकारी द्वारा समय-समय पर सरकारी सस्ता गल्ला दुकानों का निरीक्षण नहीं किया जाता है।

मीडिया से बचने के लिए केवल उच्चाधिकारियों के आदेशों के बाद भी खानापूर्ति के लिए निरीक्षण किया जाता है, डीलरों के स्टाॅक व रजिस्टर की यदि समय-समय  पर जांच की जाती तो डीलर मनमानी नहीं करते और न ही सरकारी राशन की कालाबाजारी ही संभव हो पाती। क्षेत्र की जनता ने खाद्य पूर्ति निरीक्षक की कार्यप्रणाली पर विरोध जताते हुए उन्हें अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग उठाई है।