नयी दिल्ली : उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री, सरकारी आश्वासन समीति के अध्यक्ष एवं हरिद्वार के सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को यूरोपिय देश चेक गणराज्य का आमंत्रण मिला है। यह आमंत्रण चेक गणराज्य के संस्कृति मंत्री श्री डेनियल हर्मन ने डॉ. निशंक को दिया।  इस अवसर पर भारत में चेक राजदूत श्री मिलेन होवोरका भी उपस्थित थे।

आमंत्रण के लिए हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित करते हुए डॉ. निशंक ने आशा प्रकट की कि बदलते विश्व परिवेश में भारत और चेक गणराज्य साथ मिलकर वैश्विक चुनौतियों से निपटने का मार्ग प्रशस्त करेंगे। डॉ. निशंक ने चेक गणराज्य को यूरोपिय स्थापत्य भाषा, चित्रकला, साहित्य, संस्कृति के अनुरूप निमंत्रण बताया। इस अवसर पर डॉ. निशंक ने प्रसिद्ध चेक कवि श्री जोरेस्लान सेफोर्ड की कविताओं पर लगी प्रदर्शनी में हिस्सा लिया।

प्रदर्शनी में लगी विश्व स्तरीय कविताओं की चर्चा करते हुए डॉ. निशंक ने कहा कि श्री जोरेस्लान की कविता में मानवीय मूल्यों के दर्शन के साथ मानवीय संघर्ष की सहज अनुभूति होती है। विश्व के सर्वोत्कृष्ट साहित्य की चर्चा करते हुए उन्होंने इस बात पर बल दिया कि अधिक से अधिक रचनाओं का अनुवाद विदेशी भाषा में होना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोगों को उसका लाभ मिल सके।

चेक गणराज्य के मंत्री ने डॉ. निशंक को नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की चेकोस्लाविया यात्राओं की जानकारी दी। आमंत्रण को स्वीकार करते हुए डॉ. निशंक ने बताया कि वे यूरोपीय देशों की समृद्ध साहित्यिक विरासत के प्रशंसक रहे हैं। उन्होंने कहा कि जर्मनी, पोलैण्ड, स्लोवाकिया के मध्य चेक गणराज्य की एक विशिष्ठ पहचान है।

डॉ. निशंक ने हिमालय और गंगा के संदेश को यूरोप समेत पूरी दुनिया में ले जाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हिमालय का गौरवशाली इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि वे योग, आध्यात्म की राजधानी हरिद्वार, ऋषिकेश का प्रतिनिधित्व करते हैं। यूरोप की आस्था आध्यात्म के विश्व विख्यात केन्द्र ओलामुख जो कि चेक गणराज्य में स्थित है वहाँ उनके जाने की प्रबल इच्छा है। डॉ. निशंक ने गुरुदेव रवीन्द्र के साहित्य के प्रति चैक लोगों की रूचि पर प्रसन्नता जतायी। ज्ञातव्य है कि डॉ. निशंक भारतीय शिष्टमण्डल का नेतृत्व करते हुए अपने तीन दिवसीय इण्डोनेशिया रवाना हो रहे हैं।

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