टेक्नोक्रेट के स्टिंग पर सूबे के टेक्नोक्रेट में यह अधिकारी हर किसी की जुबां पर छाया 

देहरादून : स्टिंग कारनामों के लिए मशहूर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में नेताओं और आईएएस के बाद अब एक भ्रष्ट टेक्नोक्रेट का स्टिंग आजकल चर्चाओं में है।  कहा तो यहाँ तक जा रहा है इस स्टिंग को भी उन्ही स्टिंगबाजों ने किया है जिन्होंने राजधानी में अब तक हुए लगभग सभी स्टिंग को अंजाम दिया है, चर्चा तो यहाँ तक है कि इस स्टिंग बाज़ को सरकार ने सलाखों के पीछे पहुंचाने के बजाय एक अदद गनर तक उसकी सुरक्षा के लिए मुहैया करवाया है अब यह गनर पिछली सरकार ने दिया या वर्तमान सरकार ने यह जांच का विषय है, वहीँ यह भी चर्चा है कि राज्य के एक बड़े  ब्यूरोक्रेट का उन पर आर्शीवाद होने के चलते भाजपा के अधिकांश बडे नेता भी इस स्टिंग को लेकर खामोशी साधे हुए हैं। लेकिन इस बार इस स्टिंगबाज़ के जाल में एक चर्चित और भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे एक टेक्नोक्रेट को अपना शिकार बनाया है।  

टेक्नोक्रेट के स्टिंग पर सूबे के टेक्नोक्रेट जमात  में यह अधिकारी आजकल  हर किसी की जुबां पर छाया हुआ है। सबसे ज्यादा ताज्जुब की बात तो यह  चर्चाओं में है कि  इस स्टिंगबाज़ से पहले एक और स्टिंगबाज़ भी इस टेक्नोक्रेट से एमडी बने इस अधिकारी का स्टिंग कर चुका  है और उसके साथ देश के एक मशहूर टीवी चैनल के कथित पत्रकार ने भी साथ दिया था लेकिन यह स्टिंग लेन-देन के बाद गायब तो कर दिया गया लेकिन तब से इस दोनों स्टिंगबाजों के ठेकेदारों को चर्चित के  विभाग में ठेके मिलने लगे हैं।  

चर्चा है कि सूबे में एक विभाग के चर्चित  टेक्नोक्रेट से एमडी बने अधिकारी का भष्ट्राचार को लेकर स्टिंग होने की खबर ने भूचाल मचाया हुआ है चर्चा है की इस स्टिंग की खबर सरकार के कई नेताओं तक को भी हो चुकी है लेकिन ये  नेता जनता के बीच अपनी किरकिरी होने से बचने के लिए ब्लेकमेलिंग को अपना धंधा बनाकर स्टिंग करने वाले ब्लेकमेलर पर शिकंजा कसने से पीछे हट रहे हैं,  इन नेताओ को यह डर भी कहीं न कहीं सता रहा है की अगर उन्होंने ब्लेकमेलर को बेनकाब किया तो भष्ट्राचार पर जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली सरकार का एमडी कैसे भष्ट्राचार कर रहा है, यह खुलकर सामने आ जायेगा और फिर पिछले से लेकर अब तक के कई नेता और उनके रिश्तेदार बेनकाब हो जायेंगे।

चर्चा तो यंहा तक है की एमडी व ब्लेकमेलर के बीच दो महीनो से डील चल रही है और डील यह डील तीन करोड़ से लेकर अब डेढ़ करोड़ तक पहुँच चुकी है, अगर ब्लेकमेलर यह डीलिंग करने में सफल हो गया तो यह सीधे तौर पर राज्य सरकार की बड़ी नाकामी साबित होगी। अब देखना यह होगा कि यह महज सिर्फ चर्चा ही बनकर रह जाएंगी या फिर सरकार इस पर कड़ा रुख अपनाती है इस स्टिंग में कितनी सचाई है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।लेकिन स्टिंग हुआ तो है वरना इतनी चर्चा नहीं होती और न ये टेक्नोक्रेट इनके आदेश पर कई चक्कर समझौते के लिए  दिल्ली के नहीं मार रहा होता।