फ्री में quarantine facility में रख रहा, और आप क्या कर रहें?

हरीश सती 

पहले भी लिख चुका हूँ भारत अभी संक्रमण के सेकेंड स्टेज पर है अभी थर्ड स्टेज में एंटर कर रहे हैं अगर हमने लापरवाही बरती,

अब तक हमारी सरकार ने जिस लगन और गंभीरता के साथ कार्य किया है वो सराहनीय है, चिंता मत करिए ये पोस्ट कोरोना से बचाव के लिए नही है, वो दिन रात TV पर चल ही रही है । TV नही देख सकते तो फेसबुक चला रहे मतलब इंटरनेट तो होगा ही तो सीधे WHO की वेबसाइट पे सारी जानकारी उपलब्ध है,

पर उपलब्ध क्या नही है ?
कोरोना की वजह से हो रही राजनीति और उसपर भारत का रुख ।

डोनाल्ड ट्रम्प ने एक नया शिगूफा छोड़ा है, उन्होंने कोरोना वायरस को चाइनीज वायरस कहा है इससे चिढ़ कर चीन ने इसे रेसिस्ट बताते हुए अमेरिका के टॉप इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया पत्रकारों को देश निकाला दे दिया है जो चीन में थे ।

शुद्ध रूप से यह एक चायनीज वायरस है, जो वुहान के सी फ़ूड मार्केट में पहली बार, शक है कि अवैध पशु तस्करों से फैला ।

चीन ने ये जानकारी छुपाई, उसे डर था कि इससे उसकी अर्थव्यवस्था डूब सकती है, पर अंत मे वही हुआ, इतना भयानक OUTBREAK हुआ कि चीन कुछ नही कर सका, उसने फौरन Isolation strategy पर कार्य करना शुरू कर दिया ।

ठीक उसी समय जब पूरा यूरोप सो रहा था, अमेरिका सो रहा था, भारत मुस्तैद था, जब तक यूरोपियन देश Globalisation के रुकने के नुकसान फायदे गिनते रहे तब तक बहुत देर हो चुकी थी, वो तीसरी स्टेज पे प्रवेश कर चुके थे, इटली में तो एक ही दिन में साढ़े तीन सौ लोग मर गए ।

आज सुबह सुबह ही सरकार की विरोधी और स्वरा भास्कर की सहेली सोनम कपूर लंदन से भारत आयीं अपने पति के साथ, उन्होंने कई वीडियो पोस्ट किए, उसमे उन्होंने एक बात कही की लंदन एयरपोर्ट पर कोई कोरोना की जाँच नही हो रही थी, जबकि भारत मे बाकायदे एक एक व्यक्ति से फॉर्म भरवा के उनकी ट्रेवल हिस्ट्री पूछ के जाँच के बाद ही एयरपोर्ट से जाने दिया जा रहा था,

जो एक सुखद एहसास था, व्यक्ति दुनिया मे कहीं भी हो लौट के अपने घर ही आता है, सवाल ये भी हो सकता है क्या यही सोनम कपूर वापस आतीं अगर भारत मे वो स्थिति होती जो लंदन में है ?
उल्टा ये वही से बैठे बैठे ट्वीट पे ट्वीट करतीं की भारत की सरकार कितनी निकम्मी है,

देश प्रेम उसे नही कहते जब आपके देश मे खुशहाली हो और आप मजे कर रहे हों,
देश प्रेम उस डॉक्टर से पूछिए जो लखनऊ के KGMU का है और कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्तियों का इलाज अपनी जान हथेली पर लेके कर रहा था और खुद ही संक्रमित हो गया

देशप्रेम उस प्राइम मिनिस्टर से पूछिए जो नवरात्रि उपवास रहता है पर इस बार होली नही मनाई, ताकि किसी भी प्रकार की भूल न हो जाए, जब पूरी दुनिया सो रही थी तो उसने एयरपोर्ट पर जाँच के निर्देश दिए थे,
देश प्रेम उन एयर इंडिया के फ्लाइट क्रू मेम्बर्स से पूछिए जो वुहान में घुस गए, उन डॉक्टरों की टीम से पूछिए जो ईरान में घुस गए,

ये सब योद्धा हैं, इन्होंने तो अपने जान की परवाह न करते हुए काम किया, एक हम हैं जो एयरपोर्ट पर अपने पासपोर्ट के लिए कुत्तों की तरह लड़ रहे हैं, कोरोना वायरस से संक्रमित होते हुए भी हॉस्पिटल से भाग जा रहें हैं, इटली से फटी तो भागे और यहाँ उतर कर Quarantine facility का वीडियो बना कर बता रहें कि प्लास्टर अच्छे से नही हुआ है, फाइव स्टार टॉयलेट नही है, अलग अलग सेपरेट किंग साइज बेड रूम नही है ।

इस मुश्किल घड़ी में भी सैनिटाइजर स्टॉक कर रहें हैं, मास्क स्टॉक कर रहें हैं, जब सरकार ने कह रखा है कि ज्यादा भीड़ इकट्ठा न करें न जाएँ तो क्या आप बस इतना भी नही कर सकते ?

यहाँ तो सरकार तुम्हे पकड़ रही है, फ्री में इलाज करवा रही, आइसोलेट कर रही है, इंग्लैंड में पता है क्या हो रहा है ?

बोरिस जानसन ने कहा है कि वो herd immunity को चुनेंगे न कि Isolation tactic !
अब ये herd immunity क्या है इसको साधारण भाषा मे समझिए
इसमें सरकार Community transfer का लोड नही लेती, यह एक प्रकार से डार्विन के उत्तरजीविता के सिद्धांत की तरह है, की जिसके बम में होगा दम वही जियेगा ।

होता क्या है कि हमारी शरीर का इम्यून सिस्टम ऑटोमैटिक किसी भी वायरस या बैक्टीरिया से लड़ता है, Antibodies का निर्माण होता है,
Antibodies का काम क्या होता है ये इम्यून सिस्टम द्वारा वायरस या बैक्टीरिया को पहचानती हैं और उनके खिलाफ युद्ध छेड़ देती हैं, herd immunity का मतलब है धीरे धीरे जो व्यक्ति कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ लेगा वो कोरोना के प्रभाव को न्यूट्रल कर देगा, और ऐसी एन्टी बॉडीज शरीर मे उपलब्ध रहेंगी की इस वायरस को देखते ही खत्म कर देंगी, पर जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर है वो मारे जाएंगे ।

सोचिए इतना विकसित देश और इस तरह की थ्योरी ला रहा, इसीलिए वहाँ एयरपोर्ट पर चेक्स अब तक नही हैं, दूसरी ओर भारत आपको पुलिस भेज कर इलाज के लिए उठवा रहा

फ्री में quarantine facility में रख रहा, और आप क्या कर रहें ?

आप मास्क का स्टॉक इकट्ठा कर रहें
प्लेटफॉर्म टिकट पे लड़ रहे हैं
हॉस्पिटल से भाग जा रहें
लक्षण होने पर भी चेक करवाने से डर रहें
एयरपोर्ट से भाग जा रहें
विदेश से आने पर भी खुद को 14 दिन के लिए आइसोलेट नही कर रहें हैं
सरकार को ही गालियाँ दे रहें हैं
कनिका कपूर की तरह जबरदस्ती आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं।
जबरदस्ती धरने या सामूहिक धार्मिक गतिविधियों में जा रहे हैं।
मक्का में तो मस्जिद बन्द है भारत के कई नमाजियों को जन्नत की इतनी जल्दी है कि जा पत्रकार पूछ रहा है कि इसे घर में ही कर लेते तो पूरे ज्ञान उड़ेलते हुए कहा रहा है कि सबा तो मस्जिद में आकर ही नमाज पढ़ने में आती है।
शाहीन बाग वाले बड़ी मुश्किल से माने।
कोटद्वार में मेरे घर के आगे में रोड पर कुछ लोग बिना हल्ले गुल्ले वाले माहौल का लुत्फ उठाने लोग आराम से चहलकदमी करते दिखे।कुछ लड़के तो आराम से पेंसिल फेक्ट्री के पास नीम के पेड़ के नीचे लगभग 2 घण्टे तक धूम्रपान का आनंद उठाते रहे।
कुछ मोहल्ले के अपने घरो रो से से निकल निकल कर सड़क पर सिर्फ ये देखने आते रहे कि आज खाली सड़क कैसी लग रही है।
कुछ लोग लिख रहे हैं कि नोट बंदी के बाद घर बंदी।
क्या बताएं।
और विदेशी मीडिया एक अलग हवा खड़ी कर रही कि भारत सरकार झूठ बोल रही है, इतने कम आंकड़े कैसे हैं वहाँ, न्यू यॉर्क टाइम्स ने तो बाकायदे लेख लिखकर भारत की खिल्ली उड़ाई है, कहा है गौमूत्र से कोरोना इलाज ढूंढने वाले लोगो के यहाँ बस तीन मौतें अब तक कैसे हुई हैं ?

उनकी ये जलन हमारी जीत है ।
अगर हम बड़ी महामारी के शिकार से खुद को बचा लेते हैं तो पहली बार हम किसी चीज में अमेरिका यूरोप से आगे होंगे वो भी सीमित संसाधनों के साथ ।

सोचिए वो क्षण
पर सबकुछ जनता के हाँथ में ही है, सरकार अपना कार्य बखूबी कर रही है ।