उत्तराखंड में सरकार की मुस्तैदी और जनता के सहयोग ने किया कोरोना पर नियंत्रण

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कोरोना पर पूर्ण नियंत्रण के लिए लॉकडाउन का पूरी तरह से किया जाए पालन

सरकार के हर दिशा निर्देश को अक्षरशः मानने पर ही होगी कोरोना पर जीत

राज्य में जनता की जागरूकता और विभागों में समन्वय से कोरोना पर नियंत्रण

राज्य के समक्ष उत्पन्न हुई आर्थिक चुनौतियों से निपटने की तैयारियां शुरू 

मुख्यमंत्री का लगातार जन संवाद राज्यभर से सहयोग की बड़ी वजह 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो

अभी तक उत्तराखंड में कोरोना वायरस संक्रमण नियंत्रण में है। उम्मीद है कि भविष्य में भी ऐसा ही रहेगा। सरकार की मुस्तैदी, विभागों में समन्वय तथा सबसे खास जनता के सहयोग की बदौलत ही उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण पर काफी हद तक नियंत्रण है। हालांकि यह बात भी सही है कि कोरोना वायरस से बचने के अत्यधिक सतर्कता और जागरूकता की आवश्यकता है। लॉकडाउन का पूर्णरूप से पालन तथा सरकार की गाइडलाइन का अक्षरशः पालन ही हमें कोरोना से लड़ाई में सफलता दिलाएगा।

उत्तराखंड राज्य में अभी तक संक्रमित व्यक्तियों की संख्या 37 है। वहीं नौ लोग अस्पतालों से छुट्टी लेकर अपने घर भी जा चुके हैं। उत्तराखंड में 13 में से 7 जिलों में कोरोना संक्रमण का कोई मामला नहीं है। केवल देहरादून , हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर,नैनीताल तथा पौड़ी व अल्मोड़ा जिले में कोरोना संक्रमण के मामले सामने आए हैं। पर्वतीय जिलों अल्मोड़ा और पौड़ी में एक-एक मामला है। वहीं पौड़ी जिला देश के उन 25 जिलों में शामिल हो गया, जिसने कोरोना संक्रमण का एक मामला मिलने के बाद अपने मजबूत सिस्टम से यह संख्या आगे बढ़ने नहीं दी। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने दिल्ली में नियमित प्रेस ब्रीफिंग में इन जिलों की तारीफ करते हुए यह बात कही।

तत्काल कार्यवाही से हर स्थिति पर पाया नियंत्रण

यहां शुरू से ही स्थिति नियंत्रण में रही। देहरादून में पहला केस आईएफएस अधिकारी के कोरोना संक्रमित होने का प्रकाश में आया था। जिस पर सरकारी स्तर पर तत्काल कार्यवाही करते हुए रोगी को आइसोलेशन वार्ड में भर्ती करा दिया था। साथ ही एफआरआई क्षेत्र में लॉकडाउन घोषित कर दिया था। उत्तराखंड में कोरोना संक्रमण के ज्यादातर मामले तबलीगी जमात की वजह से हुए।

केंद्र की हर गाइडलाइन का पालन करके जुटाई व्यवस्थाएं

कोरोना पर नियंत्रण की प्रमुख वजह स्थानीय लोगों का सहयोग और जागरूकता के साथ सरकारी स्तर पर केंद्र सरकार की हर गाइडलाइन को लगातार फॉलो करते हुए व्यवस्थाएं जुटाने तथा लॉकडाउन को प्रभावी बनाना भी है।

कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण के लिए केंद्र सरकार से मिले हर निर्देश का पालन तत्परता से किया गया, चाहे स्वास्थ्य विभाग संबंधी इंतजाम जैसे राज्यभर में आइसोलेशन वार्डों की स्थापना करने, राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के बीच समन्वय बनाने, राज्य के सभी बड़े अस्पतालों को किसी भी आपात स्थिति के लिए मुस्तैद करने, लॉकडाउन को प्रभावी बनाने, लॉकडाउन के समय स्थानीय निवासियों, प्रवासी कामगारों की भोजन की दिक्कतों को दूर करने, दूसरे राज्यों के रहने वाले लोगों की समस्याओं का निस्तारण करने, सभी विभागों में कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए समन्वय बनाने, सुबह बाजारों में आवश्यक वस्तुओं की खरीदारी के दौरान भीड़ नहीं लगने देने, सोशल डिस्टेंस को बरकरार रखने, पीडीएस (सार्वजनिक वितरण व्यवस्था) को व्यवस्थित करने  सहित तमाम ऐसे उपायों को व्यवस्थित ढंग से लागू कराने में उत्तराखंड सरकार खरी उतरी है।

हेल्पलाइन ने विभागों से समन्वय करके दूर की दिक्कतें

मुख्यमंत्री हेल्प लाइन लॉकडाउन में लोगों की दिक्कतों को दूर करने के लिए विभागों से समन्वय स्थापित किए हैं। हेल्पलाइन के माध्यम से घरों में खाने के सामान से लेकर गैस सिलेंडर तक पहुंचाए गए। रोगियों को अस्पताल तक भेजने की व्यवस्था में भी हेल्पलाइन सार्थक साबित हुआ। वहीं सामाजिक संस्थाओं, व्य़क्तिगत रूप से सहयोग तथा पुलिस और प्रशासन ने भी लोगों तक हरसंभव मदद पहुंचाने का कार्य किया।

कोरोना संक्रमण से बचाने को सख्ती भी जरूरी 

लॉकडाउन को पूरी तरह लागू कराने में सख्ती भी बरतनी पड़ी। इसकी कोरोना संक्रमण की आपात स्थिति में आवश्यकता भी है। नैनीताल जिला के बनभूलपुरा क्षेत्र में बवाल पर सख्ती करते हुए मुख्यमंत्री ने कर्फ्यू के आदेश देकर लोगों का घरों से बाहर निकलना बंद करा दिया। जबकि बवाल के दिन के बड़ी संख्या में लोग सड़क पर आ गए थे। कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए घरों में ही रहना है, यह बात जानते हुए भी सैकड़ों की संख्या में सड़क पर बवाल काटने वालों के लिए कर्फ्यू ही सही कार्रवाई थी, जिसे राज्य सरकार ने अंजाम दिया। सरकार के इस कदम की जागरूक लोगों ने सराहना की।

जांच कराने की बजाय छिपने वालों को बाहर निकालने की रणनीति काम आई

तबलीगी जमात से आकर सूचना देकर जांच कराने की बजाय इधर-उधर छिपने वाले लोगों को बाहर निकालने के लिए उत्तराखंड सरकार ने शानदार कदम उठाया। सरकार ने एक दिन का अल्टीमेटम देकर इन लोगों को स्वयं को पेश करने का मौका दिया। कुछ लोग स्वेच्छा से सामने आ गए और जो लोग नहीं आए, उनके खिलाफ हत्या के प्रयास के मुकदमे किए गए। इस रणनीति के परिणाम कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण के रूप में सामने आए।

मुख्यमंत्री का जनता से लगातर संवाद बड़ा काम आया

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कोरोना संक्रमण की आपात स्थिति में सोशल मीडिया और सूचना माध्यमों से जनता से लगातार संवाद बनाकर रखा। यह बेहद जरूरी है, क्योंकि ऐसे समय में लोगों के पास बहुत सारे सवाल होते हैं और वो उनका जवाब जानना चाहते हैं। यही वजह है कि राज्य सरकार के हर कदम को जन समर्थन मिला। 31 मार्च को अंतरजनपदीय परिवहन की व्यवस्था का भी लोगों ने समर्थन किया और बाद में इस व्यवस्था को वापस लेने के आदेश का भी लोगों ने स्वागत किया। मुख्यमंत्री और सूबे के आला अधिकारियों से लगातार संवाद बनाकर कोरोना से निपटने की तैयारिय़ों की समीक्षा करते रहे, इससे शासन से लेकर जिलों तक पूरा सिस्टम सतर्क रहा।

आमजन में बढ़ा विश्वास, तभी तो बढ़-चढ़कर योगदान

कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष और पीएम केयर्स फंड में दान दाताओं द्वारा बढ़चढ़कर योगदान दिया जा रहा है। हाल ही में चमोली जिला के गौचर की देवकी भंडारी जी ने अपने जीवनभर की बचत को पीएम केयर्स फंड में जमा करा दिया। किसी आम व्यक्ति का इतना बड़ा योगदान, यह साबित करने के लिए काफी है कि लोगों का केंद्र और प्रदेश की सरकारों पर इस बात का पूरा भरोसा है कि उनकी मेहनत की गाढ़ी कमाई का सही उपयोग होगा। उत्तराखंड में भी सरकारी और गैर सरकारी संगठनों के साथ आम जनमानस भी पूरे विश्वास के साथ मुख्यमंत्री राहत कोष और प्रधानमंत्री कोष में योगदान दे रहा है।

उत्तराखंड सरकार की विपक्ष भी कर रहा सराहना

राज्य में सरकार का मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस है। कांग्रेस के कदावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यों की सराहना करते हुए कोरोना के खिलाफ लड़ाई में उनके साथ खड़े रहने की बात कही। वहीं कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ मुख्यमंत्री से मुलाकात करके कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में सरकार के कार्यों की सराहना की है।

इन चुनौतियों पर भी काम शुरू 

राज्य में इसी माह चारधाम यात्रा शुरू हो रही है। चारधाम यात्रा स्थानीय निवासियों के आय का प्रमुख स्रोत है। उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थाटन का यहां के परिवहन, होटल व्यवसाय से सीधा संबंध है। कोरोना संक्रमण के दौर में यात्रा शुरू कराने की चुनौती पर राज्य सरकार ने कार्य शुरू कर दिया है।

आर्थिक चुनौतियों से निपटने की तैयारियां शुरू

सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि राज्य सरकार ने कोरोना संक्रमण से लड़ने के दौरान लॉकडाउन की वजह से आर्थिक चुनौतियों पर अभी से ध्यान देना शुरू कर दिया है। यह बड़ा सवाल है कि लॉकडाउन की वजह से राज्य के उद्यमियों, कामगारों, हर श्रेणी के व्यापारियों, परिवहन,पर्यटन पर आधारित रोजगार व स्वरोजगार को भी बड़ा नुकसान झेलना पड़ रहा है। तमाम आर्थिक चुनौतियों का सामना कैसे किया जाएगा। प्रदेश की आर्थिकी में सुधार लाने और आजीविका के संसाधनों में वृद्धि के लिए मुख्यमंत्री ने पूर्व आईएएस इंदु कुमार पाण्डे की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय सलाहकार समिति का गठन किया है। यह समिति लॉकडाउन से राज्य की अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान का अध्ययन कर राज्य के आर्थिक संसाधनों में सुधार लाने के लिए संस्तुतियां देगी। इस बात की पूरी उम्मीद है कि राज्य सरकार समिति की सिफारिशों पर कार्य शुरू कर देगी, ताकि समय रहते आर्थिक चुनौतियों से निपटा जा सके।