• राज्य हित में निजी निवेशकों को हतोत्साहित नहीं कर सकते
  • निजी निवेशकों को सरकार कोई अनुदान नहीं देती 

देहरादून : मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का कहना है राज्य में विरोध हर चीज का होता है चाहे अच्छा किया जाए या बुरा , विरोध करना राज्य की परंपरा सी बन गई है। उन्होंने कहा ऐसा  नहीं इस राज्य में सारे ही काम गलत हुए हैं कुछ सही भी तो हुए होंगे लेकिन सही कामों का कोई स्वागत नहीं करता, हर काम को राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए । प्रदेश हित में भी कई फैसले लेने होते हैं , हो सकता है इन निर्णयों के क्षणिक या तात्कालिक  लाभ भले ही न दिखाई दें लेकिन उसके कई लाभ भविष्य में राज्य को ही मिलेंगे।  लिहाजा राज्य के भविष्य को लेकर चिंता की जानी चाहिए।  

 उन्होंने मेडिकल कॉलेजों में फीस बढ़ोतरी को लेकर हो रहे विरोध पर सरकार का रुख साफ करते हुए बहुत ही साफगोई से कहा कि सूबे में निजी  निवेशक आ रहे हैं और पांच-सात सौ करोड़ रुपये मेडिकल कॉलेजों की स्थापना सहित कई अन्य संस्थानों को यहाँ स्थापित करने में पर खर्च कर रहे हैं। जबकि सरकार उन्हें कोई अनुदान नहीं  दे रही है वे अपने श्रोतों से बाहर से यहाँ पैसा लगा रहे हैं। उन्होंने कहा ऐसे में अगर प्रदेश में ऐसे बच्चे या अभिभावक आते हैं जो निजी कॉलेजों में पढ़ाई का खर्च उठा सकने में सक्षम हैं तो राज्य वासियों को निवेशकों को हतोत्साहित नहीं करना चाहिए।

गौरतलब हो कि प्रदेश सरकार ने गैरसैण में हुए बजट सत्र में उत्तराखंड अनुदानित निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थाओं (प्रवेश तथा शुल्क निर्धारण विनियम) (संशोधन) विधेयक-2018 पारित किया है। इस संशोधित विधेयक में निजी मेडिकल कॉलेजों को फीस निर्धारण का अधिकार दिया गया है। जबकि इससे पहले निजी मेडिकल कॉलेजों के लिए फीस का निर्धारण हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित प्रवेश एवं शुल्क नियामक समिति के जिम्मे था। अब विधेयक के एक्ट का स्वरूप लेते ही निजी मेडिकल कॉलेजों में फीस वृद्धि का रास्ता साफ हो गया है।

वहीँ विधेयक का एक्ट का रूप लेते ही निजी मेडिकल कॉलेजों ने फीस वृद्धि की तैयारियां शुरू कर दी है। वहीँ प्रदेश में इसका विरोध भी शुरू हो गया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सरकार का पक्ष रक्षा। तार्किक ढंग से जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश में ऐसे बच्चे या अभिभावक आते हैं जो खर्च कर सकते हैं तो उन्हें लगता है कि निजी मेडिकल कॉलेजों के क्षेत्रों में पूंजी निवेशकों को रोकना नहीं चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रदेश में तमाम निजी कालेज हैं और कई निवेशक निजी कॉलेज खोलने के लिए आवेदन कर रहे हैं। अगर हम इन्हें रोकते हैं तो राज्य का अहित होता है। उन्होंने साथ  ही ह भी कहा हर काम का विरोध उचित नहीं है। 

  • हरीश रावत ने की फीस बढ़ाने के निर्णय की आलोचना

पूर्व मुख्यमंत्री, हरीश रावत ने मेडिकल काॅलेजों फीस बढ़ाने की सरकार के निर्णय की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि, जिस प्रकार से फीस बढ़ाने का अधिकार मेडिकल काॅलेजों को दिया गया है। उससे राज्य के मेडिकल छात्र-छात्राओं का मेडिकल काॅलेज में प्रवेश लेना सम्भव नहीं हो पायेगा, क्योंकि उनकी परिवारों की आर्थिक क्षमता इतनी नहीं होती है।

उन्होंने कहा कि, सरकार को यह निर्णय कमेटी बनाकर करना चाहिये था, जिसमें सभी पक्षों की राय से निर्णय लिया जाना उचित रहता। उन्होंने कहा कि, मैंने अपनी सरकार में उपरोक्त के सम्बंध में एक कमेटी बनाई। उन्होंने सरकार से मेडिकल काॅलेजों के फीस बढ़ाने के अधिकार को वापस लेने व मेडिकल छात्र-छात्राओं को तत्काल राहत देने की अपील की है।