बिजली की मांग और कोयला बिजली उत्पादन में भी पिछले साल नम्बर एक रहा चीन

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दुनिया के कुल कोयला आधारित बिजली उत्पादन के आधे से भी ज़्यादा, 53 फ़ीसद, के लिए ज़िम्मेदार है चीन 

भारत की कोयला बिजली में लगातार दूसरे वर्ष 2020 में (-5%) की गिरावट आई, और सौर ऊर्जा में अच्छी खासी बढ़ोतरी (+ 27%) देखने को मिली

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

एम्बर के ग्लोबल इलेक्ट्रिसिटी रिव्यू के बारे में एक झलक

इस वार्षिक रिपोर्ट में 2020 में दुनिया भर में हो रहे स्वच्छ बिजली परिवर्तन के मद्देनजर दुनिया के हर देश के बिजली के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है ताकि पहला सही और विशुद्ध विवरण किया जा सके । यह 2000 से देश का ईंधन डेटा साल दर साल एकत्र करता आया है ।
दुनिया की 90% बिजली उत्पादन करने वाले 68 देशों का साल 2020 का पूरा डाटा और उसी के हिसाब से दुनिया भर में बदलाव के लिए एक अनुमान को आधार बनाया गया है । इसके अलावा सभी देशों का 2019 तक का पूरा डेटा है । G20 देशों, जिसमें विश्व बिजली उत्पादन का 84% हिस्सा शामिल है, प्रत्येक का अलग अलग गहराई से विश्लेषण किया गया है।
जहाँ पूरी दुनिया में पिछले साल लगे लॉक डाउन और मंदी के चलते बिजली की मांग घट गयी थी, वहीँ चीन में न सिर्फ बिजली की मांग बढ़ी, बल्कि कोयले से बनी बिजली के उत्पादन में भी चीन में बढ़त दर्ज की गयी। और फ़िलहाल चीन अब दुनिया के कुल कोयला आधारित बिजली उत्पादन के आधे से भी ज़्यादा, 53 फ़ीसद, के लिए ज़िम्मेदार है।
इन तथ्यों का ख़ुलासा एनर्जी थिंक टैंक एम्बर ने अपनी ताज़ा रिसर्च रिपोर्ट के ज़रिये किया। रिपोर्ट की मानें तो चीन ही G20 का अकेला देश था जिसने महामारी वर्ष के दौरान कोयला उत्पादन में बड़ा इजाफा देखा । वहीँ 2020 में पूरी दुनिया में कोयला उत्पादन में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई, जिसमें भारत और उसके अलावा अन्य देश भी शामिल हैं जो कोयला ऊर्जा शक्ति के रूप में जाने जाते थे ।
दुनिया भर में महामारी की वजह से 2020 में बिजली की मांग में काफी गिरावट आई, और पन बिजली तथा सौर ऊर्जा को बढ़ने का मौका मिला था।
कोयले से बनने वाली बिजली में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई । पवन और सौर ऊर्जा में 2020 में विकास की दर 15% (+314TWh) रही, जो कि ब्रिटेन के पूरे साल के बिजली उत्पादन कि बराबरी कि जाये तो ये उससे से भी ज़्यादा की रही । इस वजह से कोयले ऊर्जा की मांग में 4% (-346 TWh) की रिकॉर्ड गिरावट भी देखने को मिली।
लेकिन चीन उल्टी दिशा में आगे बढ़ा है। ये एकमात्र G20 देश रहा जिसने 2020 में दोनों में, बिजली की मांग और कोयला बिजली में बड़ी वृद्धि देखी । बावजूद इसके कि चीन में पवन और सौर (+98TWh) बिजली में प्रभावशाली 16% की वृद्धि दर्ज की गई लेकिन फिर भी चीन में कोयला बिजली उत्पादन में भी 1.7% (+77 TWh) की बढ़ोतरी हुई और बिजली की कुल मांग में 4% (+297 TWh) की वृद्धि हुई ।
“कुछ विकास के बावजूद चीन अभी भी अपनी कोयला उत्पादन में बढ़ोतरी को रोकने के लिए संघर्ष करता दिख रहा है,” ऐसा कहना है एम्बर के सीनियर एनालिस्ट डॉ मुई यांग का “बिजली की तेजी से बढ़ती मांग की वजह से कोयला बिजली उत्पादन में भी बढ़ोतरी हो रही है जिससे एम्मिशन भी बढ़ा है । अगर चीन सही तरीके से विकास की राह पर आगे बढ़ेगा तो वह कोयले से बनने वाली बिजली की बढ़ोतरी पर भी काबू पा सकेगा, विशेष रूप से बेकार और बेअसर पड़ी कोयला इकाइयों को खत्म करके, जिससे इस देश को अपनी जलवायु को ठीक करने के ज़्यादा से ज़्यादा अवसर प्राप्त होंगे । ”
चीन के बाद चार सबसे बड़े कोयला बिजली वाले देशों ने 2020 में कोयला बिजली में गिरावट दर्ज की : भारत (-5%), संयुक्त राज्य अमेरिका (-20%), जापान (-1%) और दक्षिण कोरिया (-13%)।
भारत की कोयला बिजली में लगातार दूसरे वर्ष 2020 में (-5%) की गिरावट आई, और सौर ऊर्जा में अच्छी खासी बढ़ोतरी (+ 27%) देखने को मिली और covid -19 के प्रभाव के कारण बिजली की मांग में (-2%) की गिरावट दर्ज की गई ।
“भारत ने अपने कदम स्वच्छ बिजली उत्पादन की ओर बड़ा दिए है”, एम्बर के सीनियर एनालिस्ट, आदित्य लल्ला ने कहा “भारत को अब अगले दस सालों में पवन तथा सौर बिजली उत्पादन को बढ़ाने की जरूरत है जिससे कोयले के इस्तेमाल में कमी और बढ़ती बिजली की मांग को भी पूरा किया जा सकेगा । भारत के पास ये सुनहरा अवसर है जिससे ये सुनिश्चित होगा कि कोयले कम होती मांग में कभी इजाफा नहीं होगा।
साल 2015 में जब पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे तब की तुलना में दुनिया भर में महामारी की वजह से 2020 में कोयले में रिकॉर्ड गिरावट के बावजूद, बिजली क्षेत्र का एमिशन अब भी लगभग 2% अधिक रहा । 2020 में कोयला दुनिया का एकमात्र सबसे बड़ा बिजली का साधन रहा । ग्लोबली कोयले का उत्पादन 2020 में 2015 की तुलना में केवल 0.8% कम रहा जबकि गैस उत्पादन 11% अधिक रहा । बावजूद इसके कि 2015 के बाद से पवन बिजली और सौर ऊर्जा का उत्पादन दुगना हुआ फिर भी बढ़ती मांग के कारण फॉसिल फ्यूल्स के इस्तेमाल को कम या खत्म नहीं किया जा सका।
2015 के बाद से दुनिया भर में बिजली की मांग 11% बढ़ी । इस अवधि के दौरान, चीन की बिजली की मांग में 1880 TWh (+ 33%) वृद्धि हुई, जो  भारत की 2020 की पूरे साल की बिजली की मांग से भी अधिक है । एशिया में, जहां बिजली की मांग काफी तेजी से बढ़ी, लेकिन स्वच्छ बिजली केवल बढ़ती बिजली की मांग के कुछ हिस्से को पूरा करने तक ही सीमित रही; 2015 से 2020 तक चीन में (54%) और भारत में (57%) दोनों में लगभग आधा। जहां एक तरफ कोयले के इस्तेमाल और उत्पादन में कमी देखी गई जिसमे यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे राज्य शामिल हैं, वहीँ दूसरी तरफ एमिशन में मामूली सी कमी देखने को मिली जिसका कारण फॉसिल फ्यूल्स का इस्तेमाल होना रहा ।
“विकास अभी तक आस पास नज़र नहीं आ रहा,” एम्बर के ग्लोबल लीड डेव जोन्स ने कहा: “महामारी के दौरान कोयले की रिकॉर्ड गिरावट के बावजूद इसमें जितनी कमी होने की ज़रुरत थी उतनी नहीं हुई है । कोयला बिजली का इस्तेमाल 80% तक कम करने की जरूरत है अगर हम 2030 तक 1.5 डिग्री से अधिक के ग्लोबल वार्मिंग के खतरनाक स्तर पर नहीं पहुंचना चाहते । हमको दुनिया भर में कोयले की जगह स्वच्छ बिजली के इस्तेमाल को बढ़ावा देकर सभी अर्थव्यवस्थाओं बदलने की जरूरत है । विश्व के नेताओं को अब इस चुनौती की विशालता को समझकर जागना होगा । ”