मुख्यमंत्री योगी ने एसपी, डीएसपी और इंस्‍पेक्‍टर को किया सस्‍पेंड,सभी का होगा नार्को टेस्‍ट

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गैंगरेप केस में पीडि़ता की मौत के बाद जबरन उसका दाह संस्‍कार कर देने की घटना से पूरे देश को हिलाकर रख दिया

जांच में शामिल पुलिसवालों और कुछ अन्‍य का नार्को टेस्‍ट कराया जाएगा

सीएम योगी ने ट्वीट कर दिया था सख्‍ती का संकेत, डीएम पर भी हो सकती है कार्रवाई 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 
लखनऊ : हाथरस गैंगरेप कांड में सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने बड़ी कार्यवाही करते हुए एसपी, डीएसपी और इंस्‍पेक्‍टर सहित कुछ अन्‍य पुलिसकर्मियों को निलंबित करने का आदेश दिया है। इन सभी अधिकारियों का नार्को पॉलीग्राफ टेस्‍ट भी कराया जाएगा। साथ ही साथ पीड़ित परिवार का भी टेस्ट किया जाएगा।
गैंगरेप केस में पीडि़ता की मौत के बाद जबरन उसका दाह संस्‍कार कर देने की घटना से पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। घटना को लेकर पिछले तीन दिन से देश भर में विरोध प्रदर्शन हो रहा था। मुख्‍यमंत्री ने पहले ही इस मामले में एसआईटी का गठन करके एक हफ्ते में पूरी रिपोर्ट मांगी है। इस टीम में एक दलित और एक महिला अधिकारी को भी शामिल किया गया है। लेकिन इस टीम की रिपोर्ट आने से पहले ही प्राथमिक जांच के आधार पर सीएम योगी ने एसपी, डीएसपी और इंस्‍पेक्‍टर को सस्‍पेंड करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही जांच में शामिल पुलिसवालों और कुछ अन्‍य का नार्को टेस्‍ट भी कराया जाएगा। 
सीएम योगी ने ट्वीट कर दिया था सख्‍ती का संकेत, डीएम पर भी हो सकती है कार्रवाई 
सूत्रों के मुताबिक हाथरस के डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। इससे पहले मुख्यमंत्री ने खुद ट्वीट कर कहा कि उत्तर प्रदेश में माताओं-बहनों के सम्मान-स्वाभिमान को क्षति पहुंचाने का विचार मात्र रखने वालों का समूल नाश सुनिश्चित है। इन्हें ऐसा दंड मिलेगा जो भविष्य में उदाहरण प्रस्तुत करेगा। आपकी यूपी सरकार प्रत्येक माता-बहन की सुरक्षा व विकास हेतु संकल्पबद्ध है। यह हमारा संकल्प है-वचन है।
डीएम के कई वीडियो वायरल 
जिस तरह आनन-फानन में देर रात को ही पीड़िता का अंतिम संस्कार किया गया उसी समय से प्रशासन की मंशा पर सवाल उठने लगे थे। परिजनों के लाख मना करने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं माने और अंतिम संस्कार करवा दिया गया। इसके बाद  सोशल मीडिया पर हाथरस डीएम प्रवीण कुमार लक्षकार का एक वीडियो वायरल हुआ। जिसमें वह पीड़िता के पिता से बात करते हुए दिख रहे हैं। वे कह रहे हैं कि आप अपनी विश्वसनीयता खत्म मत करो। ये मीडिया वाले, मैं आपको बता दूं, आधे आज चले गए और आधे कल चले जाएंगे। हम आपके साथ खड़े हैं। ये आपकी इच्छा है कि आपको बार-बार बयान बदलना है कि नहीं बदलना है। अभी हम भी बदल जाएं….।
परिजनों ने लगाए पुलिस पर गंभीर आरोप  
हाथरस मामले में पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि उन्हें किसी भी कीमत पर मीडिया से मिलने नहीं दिया जा रहा है। प्रशासन ने पीड़िता के गांव में पहले से ही धारा 144 लगा दी है। शुक्रवार सुबह पीड़ित परिवार ने एक नाबालिग बच्चे को किसी भी तरह मीडिया से संपर्क करने के लिए भेजा। बच्चे ने बताया कि हमारे कुछ मोबाइल फोन ले लिए गए हैं और हमें मोबाइल को स्विच ऑफ करने के लिए कहा गया है।
गांव में धारा 144 लगे होने के कारण पीड़ित परिवार के लोग आज खेतों को पार कर मीडिया से बात करने के लिए अपने गांव से बाहर पहुंचे थे। नाबालिग बच्चे ने बताया कि हमारा फोन ले लिया गया है। मेरे परिवार के लोगों ने बात करने के लिए मीडिया वालों को बुलाने के लिए यहां भेजा है। मैं प्रशासन को चकमा देते हुए यहां खेतों के रास्ते से आया हूं। वे लोग न तो हमें बाहर आने दे रहे हैं और न ही मीडिया वालों को अंदर आने दे रहे हैं। नाबालिग ने कहा कि हमलोगों को धमकाया जा रहा है। ये बातें जब बच्चा कह रहा था तभी एक पुलिस वाला आ गया और उसे देखकर वह फरार हो गया।
मीडिया और नेताओं की गांव में इंट्री पर रोक 
पश्चिम पंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने भी पीड़ित परिवार के पास पहुंचने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस ने उन्हें गांव के बाहर रोक दिया। गांव से करीब एक किलोमीटर पहले सख्त पहरा बैठाकर आम लोगों व मीडिया को गांव से दूर रखा गया। सुबह से प्रदर्शनकारी, पीड़ित परिवार को सांत्वना देने आने वाले लोगों को एक कदम भी बढ़ने नहीं दिया गया।  निर्भया का केस लड़ने वाली अधिवक्ता सीमा कुशवाहा पीड़ित परिवार से मिलने बूलगढ़ी जाना चाहती थीं। उन्हें गांव के मोड़ पर चंदपा के पास पुलिस प्रशासन ने रोक दिया। रोक की वजह न बता पाने पर एडीएम से उनकी बहस हुई। एडीएम पर सीमा कुशवाहा ने तीखी नाराजगी जताई।