यात्रा का समूचा विश्राम रास्ते में स्थित तीर्थ स्थलों पर होगा 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

हरिद्वार : जनकल्याण के लिए  निकाली गयी छड़ी यात्रा को शनिवार को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जूना अखाड़ा परिसर में पूजा-अर्चना के बाद चार धाम के लिए रवाना किया। यह यात्रा उत्तराखंड के प्रमुख धामों और देवमंदिरों में दर्शन करती हुई पांच नवंबर को हरिद्वार लौटेगी। 

शनिवार को मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पवित्र छड़ी को हरिद्वार तीर्थ नगरी की अधिष्ठात्री देवी माया देवी मंदिर के प्रांगण से वैदिक विधि विधान  और मंत्रोच्चार के बीच जूना अखाड़े से उत्तराखंड के चारों धामों के लिए रवाना किया।

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि इस छड़ी यात्रा से उत्तराखंड में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार द्वारा इस छड़ी यात्रा को यथासंभव सहयोग दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष चार धाम के कपाट खुलने के अवसर पर इस छड़ी यात्रा को और अधिक व्यवस्थित रूप दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस छड़ी यात्रा के शुभारम्भ से हमारे सनातनी समाज के भौतिक जीवन लक्ष्य पूरे होंगे तथा इससे समाज में सौहार्दता भी बढ़ेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आम जन मानस छड़ी यात्रा के दौरान पवित्र छड़ी का पूजन कर पूण्य के भागी बनेंगें तथा उनकी मनोकामना पूर्ण होंगी।  

मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने छड़ी को रवाना करने से पूर्व माया देवी मंदिर में महामाया देवी की पूजा अर्चना की। पूजा अर्चना के बाद मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने पवित्र छड़ी का अभिषेक किया और उसकी पूजा अर्चना कर उसको रवाना किया।

इस अवसर पर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री महन्त हरि गिरि ने बताया कि जूना अखाड़े से पवित्र छड़ी यमुनोत्री, गंगोत्री होते हुए केदारनाथ और बद्रीनाथ जाएगी। बद्रीनाथ से यह छड़ी कुमाऊं मंडल के विविध तीर्थ स्थलों से होते हुए हरिद्वार जूना अखाड़े में वापस आएगी और माया देवी के मंदिर में प्रतिष्ठित की जाएगी। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के चार धामों में इस पवित्र छड़ी को हरिद्वार से ले जाने की परंपरा पहली बार शुरू की जा रही है। इससे पहले यह छड़ी बागेश्वर कुमाऊं मंडल से चारों धामों के लिए निकलती थी। और कई सालों से यह छड़ी यात्रा बंद थी। सन् 2021 में हरिद्वार में होने वाले कुंभ को देखते हुए इस छड़ी के मार्ग में बदलाव किया गया है। अब यह छड़ी हरिद्वार से निकला करेगी और चारों धामों की यात्रा करके वापस हरिद्वार आया करेगी।

श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के प्रमुख महन्त प्रेम गिरि ने बताया कि शनिवार को पवित्र छड़ी मायादेवी मन्दिर से ऋषिकेश के लिए रवाना हुई। ऋषिकेश में त्रिवेणी घाट, दुर्गा मन्दिर, दत्तात्रेय मन्दिर, भरत मन्दिर आदि में पूजा अर्चना के पश्चात आत्म प्रकाश अखाड़ा मायाकुण्ड ऋषिकेश में रात्रि विश्राम होगा। ऋषिकेश से आगे की यमुनोत्री की यात्रा 13 अक्टूबर से प्रारम्भ की जायेगी। अमरनाथ की तर्ज पर हरिद्वार से उत्तराखंड के चारों धामों के लिए छड़ी यात्रा शुरू की गई जिसका हरिद्वार के साधु-संतों ने स्वागत किया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कहा कि मुख्यमंत्री की विशेष पहल पर यह छड़ी यात्रा फिर से कई साल बाद शुरू हो पाई है।

13 अक्तूबर को ऋषिकेश से मसूरी के रास्ते बड़कोट में रात्रि विश्राम होगा। इसके बाद 14 को जानकी चट्टी, 15 को भटवाड़ी, 16 को गंगोत्री, 17 को कोटेश्वर, 18 को केदरानाथ, 19 को गुप्तकाशी, 20 को गोपेश्वर, 21 को गोविंद घाट, 22 को लक्ष्मण कुंड, 23 को फिर गोविंद घाट, 24 और 25 को बदरीनाथ, 26 को डंगोली, 27 को सोमेश्वर, 28 को बागेश्वर, 29 को टनकपुर, 30 को पिथौरागढ़ इसके बाद 31 को दोबारा बागेश्वर पहुंचेगी।

इसके बाद दो नवंबर को जागेश्वर धाम, तीन को बिंदसर महादेव, चार को काशीपुर होते हुए पांच नवंबर को हरिद्वार वापस लौटेगी। यात्रा के पूरे रूट का निर्धारण उत्तराखंड शासन के संयोजन से किया गया है।

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