एक जुलाई से उत्तराखंड में निवास करने वालों के लिए चारधाम यात्रा शुरू

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चार धाम यात्रा के लिए उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम् बोर्ड ने दिशा निर्देश जारी किए 

चार धाम यात्रा पर जाने को ई पास के लिए आवेदन करना होगा

चारधाम में लोगों को बेहद सीमित संख्या में प्रवेश दिया जाएगा। बदरीनाथ धाम में 1200, केदारनाथ 800, गंगोत्री 600, यमुनोत्री में 400 लोगों को ही दिया जाएगा प्रवेश 

 देवभूमि मीडिया ब्यूरो
देहरादून। कोरोना संक्रमण के कारण स्थगित चल रही चारधाम यात्रा अब एक जुलाई से शुरू हो सकेगी, लेकिन उत्तराखंड से बाहर के लोगों के चारधाम यात्रा पर रोक रहेगी। चार धाम यात्रा पर उत्तराखंड के निवासी ही जा सकेंगे। इसके लिए ई पास के लिए आवेदन करना होगा। कन्टेन्मेंट और बफर जोन में रहने वाले लोग तीर्थ यात्रा पर नहीं जा सकेंगे। यात्रा के लिए उत्तराखंड चाारधाम देवस्थानम् बोर्ड ने दिशा निर्देश जारी किए हैं। 
बोर्ड के दिशा निर्देश के अनुसार, यात्रा शुरू करने से पहले बोर्ड की वर्तमान वेबसाइट https://badrinath-kedarnath.gov.in/ पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। यात्रा के समय ई पास तथा अपलोड किए गए सभी डाक्यूमेंट्स, प्रमाणपत्र साथ रखने होंगे। 
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धाम क्षेत्र में प्रवेश के दौरान हैंड सैनिटाइजर तथा मास्क का प्रयोग तथा सोशल डिस्टेंस का पालन करना अनिवार्य होगा। 
रावल, धर्माधिकारी, पुजारियों तथा श्रद्धालुओं की स्वास्थ्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसी भी धाम मंदिर के गर्भगृह तथा सभा मंडप के अग्र भाग, जो गर्भगृह से बिल्कुल सटा हुआ है, में यात्रा के लिए आए श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। 
मंदिर में प्रवेश से पूर्व हाथ पैर धोना अनिवार्य होगा तथा परिसर से बाहर से लाए गए किसी प्रसाद, चढ़ावे आदि को मंदिर परिसर में लाना वर्जित होगा। इसी प्रकार किसी देवमूर्ति को स्पर्श करना भी वर्जित होगा। 
किसी भी श्रद्धालुओं को किसी भी सूरत में एक धाम में एक रात से ज्यादा रूकने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस नियम का सख्ती से पालन भी किया जाएगा। धाम में जाने के इच्छुक 65 साल से ज्यादा श्रद्धालुओं और 10 साल से कम उम्र वाले बच्चों को किसी भी हालत में पास जारी नहीं किया जाएगा। साथ ही, गंभीर बीमारियों से पीड़ितों को भी चारधाम यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम बोर्ड के सीईओ रविनाथ रमन ने बताया कि अभी राज्य के भीतर के लोगों को ही मंजूरी दी जा रही है। इसके लिए लोगों को सम्बन्धित धाम के जिला प्रशासन से मंजूरी लेनी होगी। स्थानीय प्रशासन से यात्रा पास जारी होने के बाद ही लोग यात्रा कर सकेंगे। अभी तक  धामों से जुड़े जिलों उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली के भीतर के ही स्थानीय लोगों को ही मंजूरी दी गई थी। बदरीनाथ धाम में तो पूरे जिले को भी मंजूरी नहीं थी।