Chandrayaan- 2 का काउंटडाउन शुरू, कल तड़के चांद की ओर भरेगा उड़ान

जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लांच व्हीकल-मार्क3 लेकर होगा रवाना 

कल सुबह 2:51 पर श्रीहरिकोटा सतीश धवन सेंटर से होगा लॉन्च

Chandrayaan 2  भारत को बहुप्रतीक्षित चंद्रयान-2 मिशन सोमवार तड़के 2.51 पर तय उड़ान से 56 मिनट 24 सेकंड पहले तकनीकी खराबी के कारण रात 1 बज कर 54 मिनट और 36 सेकंड पर रोक दिया गया। उल्टी गिनती बीच में रोकने के साथ ही इसरो के मिशन से जुड़े वैज्ञानिकों ने इसका प्रक्षेपण टाल दिया। अब मिशन की नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी। वैज्ञानिक दृष्टि से यह बहुत जोखिम भरा होता यदि उड़ान के बाद उसमें खराबी आती।

देवभूमि मीडिया ब्यूरो

मिशन में चुनौतियां भी नहीं हैं कम  

धरती से चांद करीब 3,844 लाख किमी दूर है इसलिए कोई भी संदेश पृथ्‍वी से चांद पर पहुंचने में कुछ मिनट लगेंगे। यही नहीं सोलर रेडिएशन का भी असर चंद्रयान-2 पर पड़ सकता है। वहां सिग्नल कमजोर हो सकते हैं। करीब 10 साल पहले अक्टूबर 2008 में चंद्रयान-1 लॉन्च हुआ था। इसमें एक ऑर्बिटर और इम्पैक्टर था लेकिन इसमें रोवर नहीं था। चंद्रयान-1 चंद्रमा की कक्षा में गया जरूर था लेकिन वह चंद्रमा पर उतरा नहीं था। यह चंद्रमा की कक्षा में 312 दिन रहा। इसने चंद्रमा के कुछ आंकड़े भेजे थे। बता दें कि चंद्रयान-1 के डेटा में ही चंद्रमा पर बर्फ होने के सबूत पाए गए थे।

नई दिल्‍ली । भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation, ISRO) के चंद्रयान-2 (Chandrayaan2) के काउंटडाउन के साथ ही भारत ने अंतरिक्ष की दुनिया में एक और उपलब्धि की ओर कदम बढ़ा दिया है। यह काउंटडाउन रविवार (आज) सुबह छह बजकर 51 मिनट से शुरू होकर 20 घंटे चलेगा इसी दौरान सोमवार (15 जुलाई ) तड़के 2 बजकर 51 मिनट पर इसरो का यह सबसे भारी रॉकेट जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लांच व्हीकल-मार्क 3 (जीएसएलवी-एमके3) यान को लेकर चांद की तरफ श्रीहरिकोटा के सतीश धवन सेंटर से रवाना होगा। काउंटडाउन के दौरान रॉकेट और यान के पूरे सिस्टम को जांचा जाएगा। इस दौरान रॉकेट में ईंधन भी भरा जाएगा।

 

जानते हैं इस चंद्रयान -2 मिशन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें…

चांद पर यान उतारने वाला चौथा देश बन जाएगा भारत
Chandrayaan2 की लांचिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन प्रक्षेपण केंद्र से होगी। अभियान की सफलता के साथ ही चांद पर यान उतारने वाला भारत चौथा देश बन जाएगा। इससे पहले अमेरिका, चीन और रूस अपने यान चांद पर उतार चुके हैं। भारत ने 2008 में चंद्रयान-1 भेजा था, जिसने 10 माह तक चांद की परिक्रमा करते हुए प्रयोगों को अंजाम दिया था। चांद पर पानी की खोज का श्रेय इसी अभियान को जाता है। इसरो प्रमुख (ISRO chairperson) डॉ. के सिवन (Dr K. Sivan) ने बताया कि इस मिशन की सारी प्रक्रियाएं सुचारू रूप से जारी हैं।

15 मंजिले भवन के बराबर ऊंचा है यह चंद्रयान

640 टन वजनी जीएसएलवी मार्क-III (GSLV MK-III) रॉकेट को तेलुगु मीडिया ने ‘बाहुबली’ तो इसरो ने ‘फैट बॉय’ (मोटा लड़का) नाम दिया है। 375 करोड़ की लागत से बना यह रॉकेट 3.8 टन वजनी चंद्रयान-2 को लेकर उड़ेगा। चंद्रयान-2 की लागत 603 करोड़ है। इसकी ऊंचाई 44 मीटर है जो कि 15 मंजिली इमारत के बराबर है। यह रॉकेट चार टन वजनी सेटेलाइट को आसमान में ले जाने में सक्षम है। इसमें तीन चरण वाले इंजन लगे हैं। अब तक इसरो इस श्रेणी के तीन रॉकेट लांच कर चुका है। 2022 में भारत के पहले मानव मिशन में भी इसी रॉकेट का इस्तेमाल किया जाएगा। चंद्रयान-2 के 6 या 7 सितंबर को चांद की सतह पर उतरने का अनुमान है। 16 मिनट की उड़ान के बाद रॉकेट इस यान को पृथ्वी की बाहरी कक्षा में पहुंचा देगा। फिर इसे चांद की कक्षा तक पहुंचाया जाएगा।

चंद्रयान-2 के हैं तीन हिस्से

चंद्रयान-2 के तीन हिस्से हैं ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर। अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के सम्मान में लैंडर का नाम विक्रम रखा गया है। वहीं रोवर का नाम प्रज्ञान है, जो संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ होता है ज्ञान। चांद की कक्षा में पहुंचने के चार दिन बाद लैंडर-रोवर अपने ऑर्बिटर से अलग हो जाएंगे। विक्रम छह सितंबर को चांद के दक्षिणी ध्रुव के नजदीक उतरेगा और वहां तीन वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देगा। चांद पर उतरने के बाद रोवर उससे अलग होकर 14 दिन तक अन्य प्रयोगों को अंजाम देगा। चांद के हिसाब से यह अवधि एक दिन की बनेगी। वहीं ऑर्बिटर सालभर चांद की परिक्रमा करते हुए आठ प्रयोग करेगा। इस पूरे अभियान में अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी एक प्रयोग को अंजाम देगी।

चांद के कई अनछुए स्थानों तक पहुंचेगा चंद्रयान 

चंद्रयान-2 अपनी तरह का पहला मिशन है जो चंद्रमा के दक्षिण ध्रुवीय क्षेत्र के उस क्षेत्र के बारे में जानकारी जुटाएगा जो अब तक अछूता है। यह चांद के जिस दक्षिणी ध्रुव वाले क्षेत्र में उतरेगा, वहां अब तक किसी देश ने अभियान को अंजाम नहीं दिया है। यह अभियान इस हिस्से को समझने और चांद के विकासक्रम को जानने में मददगार होगा। क्षेत्र में कई विशाल क्रेटर (अंतरिक्षीय पिंडों के टकराने से बने गड्ढे) हैं, जिनमें सौर व्यवस्था के बहुत शुरुआती समय के प्रमाण मिलने की उम्मीद है। इसरो के चेयरमैन के. सिवन ने बताया कि अभियान में 30 फीसद महिलाओं ने भूमिका निभाई है। प्रोजेक्ट डायरेक्टर एम. वनिता और मिशन डायरेक्टर रितु करिधल हैं।

बेहद जटिल मिशन बता रहा है विदेशी मीडिया 

‘द वाशिंगटन पोस्‍ट’ ने इस मिशन को बेहद जटिल बताया है। विशेषज्ञों ने कहा है कि यह मिशन चांद की सतह का नक्शा तैयार करने में मददगार होगा। इस मिशन के जरिए वैज्ञानिक चांद पर मैग्नीशियम, एल्युमीनियम, सिलिकॉन, कैल्शियम, टाइटेनियम, आयरन और सोडियम जैसे तत्‍वों की मौजूदगी का पता लगाएंगे। सबसे महत्‍वपूर्ण बात यह है कि इसके जरिए चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्र के गड्ढों में बर्फ के रूप में जमा पानी का भी पता लगाने की कोशिश की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम पर भारत का जोर अपनी युवा आबादी की आकांक्षाओं को दर्शाता है।

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