सरकार की छवि खराब करने के आरोप में मुकदमा दर्ज, एक गिरफ्तार

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सरकार को अस्थिर करने के कथित पत्रकारों पर लगे आरोप 

राजद्रोह में एक हुआ गिरफ्तार, शेष के धरपकड़ को पुलिस टीम गठित 

कथित पत्रकार सहित तीन अन्य के खिलाफ एक शिकायत के बाद हुआ मामला दर्ज

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

कोर्ट पहुंचे उमेश शर्मा, आरोपियों में ही पड़ी आपसी फूट

देहरादून। डीआईजी जोशी ने बताया कि जांच में आरोपी पक्ष को जवाब और दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए समय दिया गया। लेकिन आरोपों के संबंध में दस्तावेज नहीं दिए गए।
डीआईजी ने बताया कि उमेश शर्मा ने कोर्ट में याचिका दायर की है जिसमें यह जिक्र किया है कि वीडियो में दिखाए जा रहे दस्तावेज, ऑडियो आदि साक्ष्य राजेश शर्मा ने उन्हें दिए थे। 
देहरादून : उत्तराखंड सरकार को अस्थिर करने की साज़िश करने वाले एक गिरोह द्वारा संगठित होकर सरकार और मुख्यमंत्री की छवि को सोशल मीडिया पर खराब करने के मामले में दून पुलिस ने बड़ी कार्रवाही की है।  पुलिस ने मामले में एक कथित पत्रकार सहित तीन अन्य के खिलाफ एक शिकायत के बाद मामला दर्ज किया है। जिस रिपोर्ट की बारीकी से जांच के बाद पुलिस ने कथित पत्रकारों की गिरफ़्तारी के प्रयास किये लेकिन पुलिस के हाथ अभी एक ही कथित पत्रकार पड़ा है जबकि बाकियों की तलाश के लिए कई टीमें गठित की गयीं हैं। 
मिली जानकारी के मुताबिक पुलिस थाना नेहरू कॉलोनी में बीते दिन वादी डाॅ0 हरेन्द्र सिंह रावत निवासी: एस-1, डी-6 डिफेंस कालोनी देहरादून द्वारा थाना नेहरूकालोनी में लिखित तहरीर दी की वह एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं तथा वर्तमान में कालेज आफ एज्यूकेशन मियावाला में प्रबन्धक के पद पर नियुक्त हैं। कुछ समय पूर्व उनके एक परिचित श्री ज्योति विजय रावत द्वारा उन्हें जानकारी दी कि उमेश शर्मा नामक एक व्यक्ति द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट की, जिसमें उनके तथा उनकी पत्नी श्रीमती सविता रावत के बैंक खातों में नोटबंदी के दौरान झारखण्ड से एक व्यक्ति अमृतेश चौहान द्वारा स्वंय को झारखण्ड गौ- सेवा आयोग का अध्यक्ष बनाने की एवज में रिश्वत की धनराशि श्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत को देने हेतु भेजी गयी तथा धनराशि के लेन-देन से सम्बन्धित कुछ कूटरचित दस्तावेज भी वीडियों के माध्यम से दर्शित किये गये, साथ ही उनकी पत्नी का मां0 मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड की धर्म पत्नी की सगी बडी बहन होने का दावा किया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि उमेश शर्मा व अमृतेश चौहान द्वारा अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर एक सोची-समझी साजिश के तहत उनकी निजि सूचनाओं को गैरकानूनी तरीके से प्राप्त करते हुए सार्वजनिक किया। इस सम्बन्ध में उनके द्वारा अपने ऊपर उमेश शर्मा द्वारा लगाये गये आरोपों की जांच हेतु लिखित प्रार्थना पत्र वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सम्मुख प्रेषित किया गया, जिस पर राजपत्रित अधिकारी द्वारा वीडियो में उल्लेखित सभी तथ्यों की जांच की गयी तथा जांच में उक्त सभी तथ्य व दस्तावेज कूटरचित पाये गये।
तहरीर में कहा गया है कि उमेश शर्मा द्वारा अपने अन्य साथियों, जो पर्वजन पोर्टल, पहाड टीवी समाचार चैनल तथा क्राइम स्टोरी समाचार पत्र संचालित करते हैं, के माध्यम से इस प्रकार की असत्य तथा निराधार व कपटपूर्ण खबरें अपने समाचार चैनल, पोर्टल पर चलायी गयी तथा अपने समाचार पत्र में प्रकाशित करते हुए उनकी छवि को धूमिल करते हुए सरकार को अस्थिर करने का प्रयास किया गया।
पुलिस के अनुसार चूंकि उक्त मामला अत्यंत गम्भीर प्रवृत्ति का था, जिस पर तत्काल अभियोग पंजीकृत करते हुए टीम गठित की गयी। गठित टीम द्वारा विवेचना के दौरान साक्ष्य संकलन की कार्यवाही करते हुए वादी तथा गवाहों के बयान लिये गये तथा उनके द्वारा उपलब्ध कराये गये अभिलेखीय साक्ष्यों तथा उक्त प्रसारित वीडियो व पुरानी पत्रावलियों का गहनता से अवलोकन किया गया। साक्ष्यों के अवलोकन से पाया गया कि उमेश शर्मा द्वारा अमृतेश चौहान, शिव प्रसाद सेमवाल तथा राजेश शर्मा के साथ मिलकर एक सोची-समझी साजिश के तहत सरकार को अस्थिर करने तथा सरकार व  मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड के विरूद्ध आम जन-मानस में भ्रान्ति, अप्रीति तथा घृणा उत्पन्न करने के उद्देश्य से कूटरचित दस्तावेजों को प्रदर्शित करते हुए उक्त भ्रामक वीडियो प्रसारित किया गया तथा लगातार अपने सामाचार चैनल, पोर्टल व समाचार पत्र के माध्यम से झूठी व भ्रामक खबरें प्रसारित की गयी। जिस पर तत्काल अभियुक्तगणों की गिरफ्तारी हेतु एक टीम गठित की गयी तथा गठित टीम उक्त अभियोग में अभियुक्त राजेश शर्मा को दिनाक: 31-07-2020 की रात्रि सुमन नगर, चोरखाला से गिरफ्तार किया गया। अन्य अभियुक्तों की यथाशीघ्र गिरफ्तारी हेतु टीम को निर्देशित किया गया है। गिरफ्तार अभियुक्त को न्यायालय के समक्ष पेश किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया है।

पुलिस अधीक्षक अपराध के पर्यवेक्षण में एसआईटी गठित

उक्त अभियोग की गम्भीरता के दृष्टिगत अभियोग के समयबद्ध विधिक निस्तारण हेतु पुलिस उपमहानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून द्वारा पुलिस अधीक्षक अपराध के पर्यवेक्षण में एसआईटी गठित की गयी है, जिसमें उप निरीक्षक  दिलबर सिंह नेगी थानाध्यक्ष नेहरू कालोनी, उप निरीक्षक  धर्मेन्द्र रौतेला थानाध्यक्ष प्रेमनगर, उप निरीक्षक  नत्थीलाल उनियाल थानाध्यक्ष बसन्त विहार, उप निरीक्षक  आशीष रावत चौकी प्रभारी बाईपास तथा कांस्टेबल दीप प्रकाश को नामित किया गया है।