चुनाव विश्लेषण
रुड़की में भाजपा की करारी हार
बागी ने दिखाए भाजपा को तारे

संगठन और प्रदीप बत्रा की साख पर उठे सवाल

नगर विकास मंत्री कौशिक भी सवालों के घेरे में


हरिद्वार जिले से शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक रुड़की में भी फेल हो गए। 2018 के हरिद्वार मेयर चुनाव में भी कौशिक पार्टी प्रत्याशी को नही जिता पाए थे। कौशिक हरिद्वार से भाजपा विधायक भी हैं। इधर, शहरी विकास मंत्री होने के नाते कौशिक के कंधों पर निकायों के विकास की भी जिम्मेदारी है। केंद्र और राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं के जरिये स्थानीय निकायों को भरपूर मदद भी कर रही है। इसका सकारात्मक असर मतदाताओं पर भी पड़ना चाहिए था। लेकिन मंत्री और सरकार इसका चुनावी लाभ नहीं ले पायी। लिहाजा मुख्यमन्त्री, निशंक, प्रदीप बत्रा के साथ शहरी विकास मंत्री भी रुड़की के परिणाम को लेकर सवालों के कठघरे में खड़े हैं।

अविकल थपलियाल

देहरादून। महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक ड्रामे के बीच उत्तराखंड से भाजपा के लिए अत्यंत ही निराशाजनक खबर सामने आयी है। रविवार की रात तक चली रुड़की नगर निगम मेयर की मतगणना में भाजपा प्रत्याशी मयंक गुप्ता को करारी हार ही नहीं झेलनी पड़ी बल्कि कांग्रेस के बाद तीसरे स्थान पर खिसकना पड़ा। यहां भाजपा के बागी गौरव गोयल ने अहम मतों से जीत कर भाजपा खेमे में सन्नाटा फेर दिया। मयंक गुप्ता मुख्यमन्त्री त्रिवेंद्र रावत की पसन्द के उम्मीदवार थे। और भाजपा ने रुड़की में पूरी ताकत भी झोंकी थी।

भाजपा के लिए रुड़की की हार इसलिए चिन्तनीय कही जा रही है कि यहां से भाजपा के स्थानीय विधायक प्रदीप बत्रा भी खासा दम रखते है। इसके अलावा हरिद्वार संसदीय से निशंक केंद्रीय मंत्री है। रुड़की में पर्वतीय मतदाताओं की संख्या भी निर्णायक स्थिति में रही है। निशंक इन मतों को भाजपा की झोली में डलवा सकते थे।लेकिन चुनाव में पिटने के बाद भाजपा के सूत्र यह भी कह रहे हैं कि पार्टी ने निशंक का कोई कार्यक्रम नहीं लगाया था। उधर, अब यह बात भी खुल कर सामने आ रही है कि प्रत्याशी चयन में मुख्यमन्त्री ने निशंक व प्रदीप बत्रा की राय नही ली। जबकि ये लोग गौरव गोयल के पक्ष में थे। नतीजतन भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर गौरव गोयल ने निर्दलीय ताल ठोक भाजपा को तीसरे स्थान पर धकेल दिया। 

गौरतलब है कि प्रदीप बत्रा 2016 में हुई बगावत के बाद कांग्रेस से भाजपा में आये थे। लेकिन भाजपा में अभी तक बहुत सन्तुष्ट नहीं दिख रहे हैं। उधर, निशंक व मुख्यमन्त्री त्रिवेंद्र रावत के बीच चुनाव के समय ट्यूनिंग का झोल साफ साफ दिखाई देता रहा है। पूर्व में डोईवाला विधानसभा चुनाव के समय भी निशंक समर्थकों पर त्रिवेंद्र गुट भितरघात का आरोप चस्पा करता रहा है।

अब रुड़की नगर निगम चुनाव में भाजपा की बेहद करारी हार से मुख्यमन्त्री त्रिवेंद्र, निशंक और प्रदीप बत्रा के बीच एक नए मोर्चे पर नाजुक जंग होने की पूरी पूरी संभावना है।रुड़की के परिणाम की आड़ में केंद्रीय नेतृत्व मुख्यमन्त्री से भी सवाल पूछेगा। निशंक और प्रदीप बत्रा भी अपनी नैतिक जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। ये सवाल इसलिए कि मुख्यमन्त्री से जुड़े गुट का भी इन दोनों नेताओं पर ये आरोप है कि बागी गौरव गोयल को ऑक्सीजन अपने ही लोग दे रहे थे।

दूसरी ओर,भाजपा की इस शर्मनाक हार में कांग्रेस अपनी जीत देख रही है। वैसे भी कांग्रेस के लिए रुड़की में खोने के लिए कुछ भी नहीं था।

हरिद्वार संसदीय इलाके के रुड़की नगर निगम चुनाव में निर्दलीय गौरव गोयल ने कांग्रेस और भाजपा को चारों खाने चित्त कर दिया।कांग्रेस के लिए यह सुकून का विषय रहा कि उसका प्रत्याशी दूसरे नंबर पर रहा। एक बात अब यह भी साफ हो गयी है कि केंद्रीय कैबिनेट मंत्री निशंक ,स्थानीय विधायक प्रदीप बत्रा की राजनीतिक जमीन में मुख्यमन्त्री त्रिवेंद्र रावत की पसंद के उम्मीदवार मयंक गुप्ता की करारी हार भाजपा में एक बड़ा भूचाल का सबब बनेगी।

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