देहरादून : फिल्म विकास बोर्ड भंग किए जाने के इस फैसले में ‘न जाने उनकी क्या मजबूरियां रहीं होंगी’ यह बात फिल्म विकास बोर्ड भंग किए जाने से के बाद अभिनेता और फिल्म विकास बोर्ड के पूर्व उपाध्यक्ष हेमंत पांडे ने कही ।  उन्होंने कहा कि वे तो राजा लोग हैं, राजा कभी भी कोई निर्णय ले सकता है। हेमंत पांडे ने फिल्म विकास बोर्ड को  भंग किए जाना खुद के लिए सबसे बड़ा राजनीतिक झटका बताया। 

साथ ही उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि बगैर पैसे के कोई बोर्ड नहीं चलता है सरकार ने पिछले दो साल में बोर्ड को एक भी पैसा नहीं दिया। उन्होंने कहा जितना मैं कर सकता था, मैंने किया। मुख्यमंत्री फिल्म विकास बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं, लेकिन पिछली बैठकों में  वे एक बार भी बोर्ड की बैठक में नहीं पहुंचे , वे बैठक में क्यों नहीं आए, यह मैं नहीं जानता।

उन्होंने कहा कि मैं उत्तराखंड में फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों को सम्मानित करना चाहता था। इसके लिए हमने एक सम्मेलन कराने की योजना बनाई थी। जब मैं इस संबंध में मुख्यमंत्री से मिला तो उन्होंने मुझे कार्यक्रम की मंजूरी दे दी, इसके बाद उन्होंने सम्मेलन से इन्कार कर दिया। यह मुझे काफी बुरा लगा, लेकिन उनकी भी कुछ मजबूरियां रहीं होंगी। उनके चारों तरफ अच्छे लोग नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि जब सरकार ने बदरीनाथ मंदिर कमेटी को भंग किया था तो कमेटी के पदाधिकारी कोर्ट चले गए थे और दस दिन में कोर्ट के आदेश पर कमेटी बहाल करनी पड़ी। फिलहाल मैं ऐसा कोई काम नहीं करूंगा, क्योंकि समिति को भंग किया जाना ही मेरे लिए अपमान की बात है। बता दें कि अभिनेता हेमंत पांडे भाजपा के कार्यक्रमों में भी शामिल होते आए हैं। 
हेमंत पांडे ने कहा कि मुख्यमंत्री ने हमारी ओर से भेजे गए दो प्रस्तावों को मंजूरी दी है, इसके लिए मैं उनका आभार जताना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में शूटिंग टैक्स फ्री करना और गढ़वाल मंडल और कुमाऊं मंडल विकास निगम में ठहरने के लिए 50 प्रतिशत फ्री करना का प्रस्ताव बोर्ड ने ही मुख्यमंत्री को भेजा था।   

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