• मृत्युंजय के खिलाफ एक और मामले में चार्जशीट दाखिल

  • अधिकारियों और नेताओं के स्टिंग प्रकरण में भी है आरोपित

  • आंतरिक जांच समिति के सदस्यों को विजिलेंस ने बनाया है गवाह

  • भ्रष्टाचार  के मामले में पिछले महीने दाखिल हो चुकी है एक अन्य चार्जशीट

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून: भ्रष्टाचार के मामले में जेल में बंद उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय के निलंबित कुलसचिव मृत्युंजय मिश्र की मुश्किल और बढ़ गई हैं। डोईवाला पुलिस ने विश्वविद्यालय में हुए 65 लाख रुपये के फर्नीचर और चिकित्सकीय उपकरणों की खरीद में किए गए घोटाले में आरोप पत्र अदालत में दाखिल कर दिया है। प्रकरण में मृत्युंजय समेत तीन के खिलाफ जून 2018 में अभियोग पंजीकृत हुआ था, लेकिन विवेचना के दौरान दो आरोपित सरकारी गवाह बन गए। ऐसे में केवल मृत्युंजय के ही खिलाफ आरोप पत्र तैयार किया गया है।

बता दें कि वर्ष 2016 में उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय को मान्यता देने के लिए केंद्रीय भारतीय औषधि परिषद (सीसीआइएम) की टीम आने वाली थी। उस समय मृत्युंजय मिश्र कुलसचिव के पद के पर तैनात था। उसने इंद्रप्रस्थ नत्थनपुर नेहरू कॉलोनी स्थित ऋषभ इंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर सुधीर पांडेय से संपर्क किया और कहा कि टीम के निरीक्षण के मद्देनजर फर्नीचर और चिकित्सकीय उपकरणों की आवश्यकता है। वह सामान की आपूर्ति कर दें। भुगतान बाद में तय प्रक्रिया पूरी करने के बाद कर दिया जाएगा। 18 मई 2016 से 21 जून 2016 के बीच सामान की आपूर्ति कर दी गई। सीसीआइएम के निरीक्षण के बाद टेंडर निकाला गया, जब कि यह नियमविरुद्ध था। मामले में कोर्ट के आदेश डोईवाला कोतवाली में तीन जुलाई 2018 को आइपीसी की धारा 420 और 406 के तहत मुकदमा पंजीकृत किया गया था, लेकिन विवेचना के बाद आरोप पत्र आइपीसी की धारा 406 में दाखिल किया गया है।

गौरतलब हो कि विजिलेंस ने अभी पिछले महीने मृत्युंजय के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में आरोप पत्र दाखिल किया था। आयुर्वेद विवि में करीब एक करोड़ रुपये के घपले का आरोप है। वहीं, आय से अधिक संपत्ति मामले की विजिलेंस में अभी जांच चल रही है। माना जा रहा है कि अगले महीने तक विजिलेंस इस मामले में भी चार्जशीट अदालत में दाखिल कर सकती है।

उत्तराखंड के वरिष्ठ नौकरशाहों और नेताओं के स्टिंग प्रकरण में भी मृत्युंजय मिश्र पर राजपुर थाने में मुकदमा दर्ज है। इस मामले में पुलिस एक टीवी चैनल के मालिक के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इस मामले में मृत्युंजय मिश्र की भूमिका की पुलिस अभी जांच कर रही है।

पुलिस ने मृत्युंजय के खिलाफ कुल आठ लोगों को गवाह बनाया है। इसमें प्रकरण की जांच करने वाली आंतरिक जांच समिति के अध्यक्ष और सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इसके साथ ही उन दोनों स्टाफ को भी गवाह बनाया गया है, जिनके खिलाफ मृत्युंजय के साथ मुकदमा पंजीकृत हुआ था।

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