शिव मंदिरों में भतूज उत्सव मनाए जाने की है प्राचीन परम्परा

स्थानीय अनाज चावल, झंगोरा, कोंणी का किया जाता है शिवलिंग पर लेप 

मान्यता :भतूज पर्व पर भगवान अनाज से विषाक्त पदार्थों को कर देते हैं समाप्त

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

गुप्तकाशी : केदारनाथ धाम में रक्षाबंधन से पूर्व बुधवार को अन्नूकट (भतूज) मेले का परंपरागत रूप से आयोजन किया जाएगा। भतूज मेले को लेकर बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

परम्परागत रूप से रक्षाबंधन से एक दिन पहले लगने वाले इस धार्मिक मेले को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह है। बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी)अध्यक्ष मोहन प्रसाद थपलियाल ने सभी को मेले की शुभकामनाएं दी हैं । वहीं मंदिर समिति उपाध्यक्ष अशोक खत्री ने बताया कि केदारघाटी के विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी, ओंकारेश्वर मंदिर उखीमठ सहित सभी शिव मंदिरों में भतूज उत्सव मनाए जाने की परम्परा है।

वहीं बीकेटीसी के कार्याधिकारी के कार्याधिकारी एनपी जमलोकी ने बताया कि 14 अगस्त रात्रि को भगवान केदारनाथ को स्थानीय अनाज चावल, झंगोरा, कोंणी आदि का लेप शिवलिंग पर किया जाता है। साथ ही चांवलों से स्वयंभू लिंग को ढक दिया जाएगा।

इस दौरान मुख्य पुजारी द्वारा शिवलिंग का श्रृंगार किया जाएगा। रात्रिभर मंदिर दर्शन के लिए खुला रहेगा। रात्रि लगभग साढे़ आठ बजे भतूज मेला शुरू होगा, जो सुबह 4 बजे तक चलेगा। सुबह केदारनाथ को अर्पित लेप को को मंदाकिनी नदी में प्रवाहित कर दिया जाएगा।

ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव अनाज से विषाक्त पदार्थों को समाप्त कर देते है। इस मेले को लेकर लोगों में ख़ासा उत्साह है। वहीं केदारनाथ धाम में 5 अगस्त से चल रहे शिव महापुराण कथा का 15 अगस्त को समापन किया जाएगा। बीकेटीसी के सीईओ बीडी सिंह ने बीते दो सप्ताह से केदारनाथ धाम में मौजूद हैं। वह शिव महापुराण कथा संपन्न होने तक वे केदारनाथ में ही प्रवास पर रहेंगे।

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