• कैबिनेट मंत्री का दिया गया दर्जा 

  • अजीत डोभाल के गांव घीड़ी में मना जश्न

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल का कार्यकाल 5 साल के लिए और बढ़ा दिया गया है। साथ ही उन्हें केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया गया है। सोमवार को सरकार ने इस पर मुहर लगाई। डोभाल को यह जिम्मेदारी राष्ट्रीय सुरक्षा में उनके योगदान को देखते हुए दी गई है। सर्जिकल स्ट्राइल और एयर स्ट्राइक की योजना का श्रेय डोभाल को दिया जाता है। डोभाल का फिर से एनएसए बनना बताता है कि मोदी के साथ-साथ पीएम मोदी के साथ-साथ नए गृह मंत्री अमित शाह भी उनके काम से संतुष्ट हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कार्यकाल बढ़ाने पर उनके पैतृक गांव पौड़ी जिले के घीड़ी में गुड़ बांटकर मुंह मीठा कराया गया। गांव में ढोल बजे और आतिशबाजी भी की गई। सोमवार को जैसे ही अजीत डोभाल के कार्यकाल बढ़ाने का समाचार आया, गांव में जश्न शुरू हो गया। डोभाल के चचेरे भाई और घीड़ी के ग्राम प्रधान अजय डोभाल ने बताया कि अजीत गांव के ही नहीं, देश के गौरव हैं। वह कहते हैं कि उन्हें पूरा विश्वास था कि डोभाल फिर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनेंगे। उन्होंने बताया कि रविवार की रात उनकी अजीत डोभाल के पुत्र शौर्य डोभाल से बात हुई थी। शौर्य ने उन्हें संकेत दे दिए थे। हालांकि इस पर मुहर सोमवार को ही लगी। पूरे गांव में गुड़ बांटा गया। उन्होंने कहा कि पहाड़ में खुशी के अवसर पर मुंह मीठा करने का यह पारंपरिक तरीका है।

अजय ने बताया कि डोभाल वर्ष 2014 में जब पहली बार राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार नियुक्त किए गए थे, इसके बाद वह कुलदेवी की पूजा में शामिल होने गांव आए थे। हालांकि सुरक्षा कारणों से वह अपने पैतृक घर नहीं जा पाए थे। उन्होंेने बताया कि वक्त की कमी के कारण अजीत गांव कम ही आ पाते हैं, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही वह फिर गांव आएंगे। गौरतलब है कि अजीत डोभाल का जन्म वर्ष 1945 में घीड़ी गांव में हुआ था। कक्षा चार तक की शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय में ली। इसके बाद अजमेर के सैनिक स्कूल में प्रवेश लिया। आगरा विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद उनका आइपीएस में चयन हुआ।

पिछली सरकार में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रहे अजीत डोभाल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर पांच साल के लिए नेशनल सिक्यॉरिटी ऐडवाइजर (एनएसए) नियुक्त कर दिया गया है। इसके अलावा उन्हें सरकार में कैबिनेट रैंक भी दी गई है। कैबिनेट में अब उनका कद राज्यमंत्री के बराबर होगा।

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में घुसकर आंतकियों के कैपों को नष्ट करने के सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन के पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का बड़ा हाथ था। पीओके में अंजाम दिए गए सर्जिकल ऑपरेशन की निगरानी रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और डीजीएमओ ले.जन. रनबीर सिंह कर रहे थे।

अजीत डोभाल अटल बिहारी वाजपेई के काफी भरोसेमंद माने जाते थे और अब प्रधानमंत्री मोदी के लिए भी काफी खास हो गए हैं। डोभाल जिस तरह से अपने इंटेलीजेंस ऑपरेशंस को अंजाम देते हैं, उसकी वजह से उन्हें कुछ लोगों ने भारत का ‘जेम्स बांड’ तक करार देना शुरू कर दिया था।

अजीत डोभाल के मार्गदर्शन में म्यामार में भी भारतीय सेना ने घुसकर उग्रवादियों को मौत की नींद सुला दिया था। देश की सुरक्षा में अजीत डोभाल के योगदान के देखते हुए उन्हें हिंदुस्तान का ‘जेम्स बांड’ कहा जाता है। अजीत कुमार डोभाल, आई.पी.एस. (सेवानिवृत्त), दोबारा भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाए गए हैं।

अजीत डोभाल का जन्म 1945 में उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के घीडी गांव में एक सामान्य परिवार हुआ। उन्होंने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा अजमेर के मिलिट्री स्कूल से पूरी की थी, इसके बाद उन्होंने आगरा विश्व विद्यालय से अर्थशास्त्र में एमए किया और पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद वे आईपीएस की तैयारी में लग गए। वे केरल कैडर से 1968 में आईपीएस के लिए चुन लिए गए।

वे पाकिस्तान में सात सालों तक खुफिया जासूस की भूमिका में रह चुके हैं। पाकिस्तान में अंडर कवर एजेंट की भूमिका के बाद वे इस्लामाबाद में स्थित इंडियन हाई कमिशन के लिए काम किया। कांधार में आईसी-814 के अपहरण प्रकरण में अपहृत लोगों को सुरक्षित वापस लाने में अजीत की अहम भूमिका रही थी।

बता दें कि वे सबसे कम उम्र के पुलिस अफसर हैं जिन्हें विशेष सेवा के लिए पुलिस मेडल मिला है। अजीत न सिर्फ एक बेहतरीन खुफिया जासूस हैं। बल्कि एक बढ़िया रणनीतिकार भी हैं। वे कश्मीरी अलगाववादियों जैसे यासिन मलिक, शब्बीर शाह के बीच भी उतने ही प्रसिद्घ हैं जितना कि भारत के आला अफसरों के बीच हैं।

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