• बिना किसी जांच के शरीर के भीतर की विकृति का लगाया जा सकता है पता 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो

ऋषिकेश  : अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में शनिवार को प्वाइंट ऑफ केयर अल्ट्रासाउंड (पोकस) तकनीक पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें संस्थान के अलावा दिल्ली एम्स की फैकल्टी व चिकित्सकों ने प्रतिभाग किया।

एम्स के एनेस्थीसिया एंड क्रिटिकल केयर विभाग की ओर से आयोजित पोकस कार्यशाला का शनिवार को एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत ने विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर निदेशक एम्स प्रो. रवि कांत ने बताया कि वह पूर्व में विदेशों में इस आधुनिकतम तकनीक का उपयोग कर चुके हैं।

एम्स निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत ने बताया कि इस तकनीक का लाभ यह है कि इससे बिना किसी जांच के मनुष्य शरीर के भीतर की विकृति का पता लगाया जा सकता है। निदेशक एम्स ने बताया कि एम्स ऋषिकेश के आईसीयू में अल्ट्रासाउंड की आधुनिकतम पोकस तकनीक शुरू की जा चुकी है। जिसका लाभ आईसीयू में भर्ती होने वाले गंभीर रोगियों का मिल रहा है।

निदेशक प्रो. रवि कांत ने बताया कि जो लोग अब तक इस आधुनिकतम तकनीक से अवगत नहीं हैं, उन्हें इसके बारे में प्रशिक्षित करना इस कार्यशाला का उद्देश्य है, जिससे चिकित्सक इस तकनीक का लाभ रोगियों को दे सकें।

एनेस्थीसिया विभाग के डा. अंकित अग्रवाल ने बताया कि आईसीयू में भर्ती गंभीर रोगी अल्ट्रासाउंड आदि जांच के लिए इधर -उधर जाने में असमर्थ होते हैं, ऐसे में मशीन को मरीज तक पहुंचाकर उन्हें पोकस तकनीक की सुविधा मिल सकेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में अल्ट्रासाउंड मशीनों का आकार इतना छोटा हो गया है कि अब अल्ट्रासाउंड को मोबाईल फोन पर भी देखा जा सकता है।

कार्यशाला का आयोजन डा.अजीत कुमार व डा.प्रवीन तलावर ने किया। कार्यशाला में दिल्ली एम्स से आए विशेषज्ञ डा. पुनीत खन्ना ने ने मरीजों पर इस तकनीक का प्रदर्शन किया व प्रशिक्षुओं को इस क्षेत्र की अपडेट व तकनीकी विकास से अवगत कराया।

डा. प्रियंका मिश्रा के संचालन में आयोजित कार्यशाला में मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. ब्रह्मप्रकाश, डीन (एकेडमिक) प्रो. सुरेखा किशोर, डीन (एलुमिनाई) प्रोफेसर बीना रवि, डीन (स्टूडेंट्स वैलफेयर) प्रो. मनोज गुप्ता, प्रो.शालिनी राव,समन्वयक डा. अजीत कुमार, डा. प्रवीन तलावर,डा. अंकित अग्रवाल, डा.अनुपमा बहादुर, डा.आशी चुघ,डा.अनुभा अग्रवाल,डा. गौरव जैन, डा. अजय कुमार आदि मौजूद थे।

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