AIIMS का विश्वस्तरीय तकनीक और चिकित्सीय सुविधा के साथ पांच हजार बेड का अस्पताल बनाने का लक्ष्य

तीन हैलीकॉफ्टर की लैंडिंग की सुविधा के साथ हैलीपैड निर्माण कार्य अंतिम चरण में है

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एम्स ऋषिकेश के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत के नेतृत्व में AIIMS ने छुए विकास के नए आयाम 

एम्स मेडिकल शिक्षा के साथ-साथ शीघ्र ही स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में भी अपने बढ़ाएगा कदम 

200 बेड से शुरू हुए एम्स अस्पताल में वर्तमान में मरीजों को 960 बेड की सेवाएं

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

ऋषिकेश : AIIMS अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी ने कहा कि एम्स मेडिकल शिक्षा के साथ-साथ शीघ्र ही स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में भी अपने कदम बढ़ाएगा, जिससे संस्थान में कार्यरत स्टाफ के बच्चों को कैम्पस में ही बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके। इसके लिए योजना तैयार की जा रही है। निदेशक एम्स ने बताया कि 200 बेड से शुरू हुए एम्स अस्पताल में वर्तमान में मरीजों को 960 बेड की सेवाएं प्रदान कर रहा है। निदेशक एम्स ने बताया कि संस्थान ने विश्वस्तरीय तकनीक और चिकित्सीय सुविधा के साथ इसे पांच हजार बेड का अस्पताल बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह तभी संभव होगा जब टीम भावना से कार्य किया जाए।

एम्स परिसर में आयोजित कार्यक्रम में निदेशक पद्मश्री प्रो. रवि कांत जी ने एम्स की उपलब्धियां गिनाई। उन्होंने सहकर्मियों से आह्वान किया कि टीम भावना से कार्य करते हुए एम्स संस्थान को न केवल देश वरन दुनिया में पहचान दिलाने को सामुहिक प्रयास करें। जब हम मिलकर सकारात्मक सोच और सेवाभाव से कार्य करते हैं तो हमें सर्वोच्च शिखर तक पहुंचने में कोई बाधा नहीं रोक सकती। उन्होंने एम्स के प्रशासनिक अधिकारियों, विभागाध्यक्षों, चिकित्सकों, फेकल्टी सदस्यों, नर्सिंग स्टाफ एम्स को विश्वस्तरीय संस्थान बनाने के लिए टीम भावना से कार्य करें। उन्होंने सहकर्मियों से प्रत्येक मरीज से मृदुभाषी व्यवहार के साथ पेश आकर उसका बेहतर इलाज करना हमारी प्राथमिकता में शामिल होना चाहिए।

निदेशक ने बताया कि एम्स में कार्यरत समस्त स्टाफ के बच्चों के अध्ययन के लिए कैंपस में ही स्कूल स्थापित किया जाएगा, इस योजना पर कार्य चल रहा है,स्कूल का संचालन और प्रबन्धन एम्स की फेकल्टी के हाथों होगा, और फेकल्टी सदस्य को ही स्कूल की प्रबन्धन कमेटी में शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि संस्थान का ऑडिटोरियम लगभग बनकर तैयार हो चुका है।

निदेशक एम्स ने बताया कि संस्थान ने विश्वस्तरीय तकनीक और चिकित्सीय सुविधा के साथ इसे पांच हजार बेड का अस्पताल बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह तभी संभव होगा जब टीम भावना से कार्य किया जाए। उन्होंने बताया कि संस्थान अतिशीघ्र ई-बिलिंग की शुरुआत करने जा रहा है, जबकि न्यूरोलाॅजी और आईटी विभाग द्वारा ई-ऑफिस की शुरुआत पहले ही की जा चुकी है।

उन्होंने संस्थान में आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत किए गए मरीजों के उपचार संंबंधी आंकड़ों को एक मिसाल करार दिया और बताया कि एम्स ने इस योजना के तहत अब तक 16 हजार से अधिक मरीजों का इलाज किया जा चुका है, यह देश के अन्य बड़े सरकारी संस्थानों के मुकाबले स्वयं में एक बड़ा रिकाॅर्ड है। इसके लिए उन्होंने संस्थान स्टाफ को बधाई दी। उन्होंने संस्थान में संचालित प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले जाने, कैशलैस कैंपस जैसी सुविधाओं को भी जनहित में बताया। निदेशक ने बताया कि वर्तमान में एम्स में विश्वस्तरीय मानकों पर 54 ऑपरेशन थियेटर सफलतापूर्वक संचालित किए जा रहे हैं।

उन्होने बताया कि उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों से आपात स्थिति में मरीज को सीधे एयर एंबुलेंस के माध्यम से एम्स परिसर में लाया जा सकेगा। इसके लिए तीन हैलीकॉफ्टर की लैंडिंग की सुविधा के साथ हैलीपैड निर्माण कार्य अंतिम चरण में है।