”रे मालू ” गीत पर मचे बवाल के बाद संगीता ढौंडियाल ने बदले गाने के बोल

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”रे मालू” के नए बोल लेकर आई संगीता ढौंडियाल

हजारों ने एक ही दिन में किया पसंद 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून  : संगीता ढौंडियाल ने ”रे मालू ” पर कुछ लोगों द्वारा प्रायोजित विरोध को देखते हुए अपना ”रे मालू ” गीत भले ही यू -ट्यूब से हटा दिया था लेकिन कहते हैं कि प्रतिभा तो कोई किसी की नहीं छीन सकता तो संगीता अब ”रे मालू ” के गीत के बोल में परिवर्तन क्र एक बार फिर यू -ट्यूब  पर चा गयी है।  जिसे हज़ारों लोगों का एक बार फिर समर्थन मिला है और लगातार यह गीत सफलता के पायदान चढ़ता जा रहा है। 

इस गीत के रिलीज होने से पहले भले ही उनको की धमकियां क्यों न मिली हो और उनकी प्रतिभा पर पहरा बैठाने का जो कुत्सित प्रयास चुनिंदा लोगों ने इस गीत में क्षेत्रवाद की भावनाओं को भड़काकर संगीता को भले ही पहले वाले गीत को यू -ट्यूब से हटाने पर मजबूर क्यों न किया हो लेकिन यह नया गीत संगीता के विरोधियों के मुंह पर तमाचा है जो उनकी प्रतिभा को  पहचान सके थे। 

क्या कहा था संगीता ने उस समय उनकी जुबानी पढ़िए 

…मैं राठ क्षेत्र के अपने सभी भाई बंधुओं को यह बताना चाहती हूं कि 31 जुलाई को U TUBE पर निकले मेरे गीत “रे मालू” में “राठ मुल्क” शब्द के प्रयोग के कारण मेरे राठ क्षेत्र के भाई बहनों को ठेस लगी थी। इसलिए आपकी बात को मानते हुए मैंने वर्तमान गीत को तत्काल प्रभाव से वीडियो delete ( हटा) कर दिया है, और अब आपकी भावनाओं के अनुसार ही मैं इसे सुधार कर गीत से “राठ मुल्क” शब्द ही हटा रही हूँ,और नए गीत में इसका कोई जिक्र नही होगा, क्योंकि राठ मुल्क तो मेरा अपना भी है और राठ के सभी भाई- बहनों की भावनाओं का सम्मान करते हुए मैं इस गीत को सुधार कर, और दोबारा रिकॉर्ड कर आपके बीच लाऊंगी और मुझे पूरा विश्वास है कि इस बार आप सभी मुझे अपना पूर्ण सहयोग और आशीर्वाद देंगे ।।

देहरादून : उत्तराखंड के लोककलाकारों में संगीता ढौंडियाल किसी परिचय का मोहताज़ नहीं है।  तमाम लोकगायकों में संगीता ने नए -नए प्रयोग कर जहाँ अपने उत्तराखंड की संस्कृति को संजय रखने का प्रयास किया है वहीँ उन्होंने उत्तराखंड के खासकर गढ़वाल के पुराने लोक गीतों को नया रूप देकर उन्हें नयी पीढ़ी के सामने कुछ इस तरह प्रस्तुत किया है कि वे भी अपने लोकगीत के संगीत में डूबते चले गए। 

बीते दिन ही संगीता ढौंडियाल ने ”रे मालू ” के गीत को पहाड़ी दगड़्या प्रोडक्शन की टीम के साथ खुद ही कम्पोज किया और गीत के संगीतकार रंजीत सिंह हैं। सोहन चौहान और सैंडी गुसाई ने कोरियोग्राफी की है। गोविंद नेगी इसके डायरेक्टर और कैमरामैन हैं। गीत को तैयार करने में नंदकिशोर हटवाल, अश्वजीत सिंह, अरुण ढौंडियाल, अजय जोशी का भी सहयोग रहा है। इस गीत में जहाँ पहाड़ के गांव की छटा को मनमोहक तरीके से प्रस्तुत किया गया है वहीँ गीत की शूटिंग बेहतरीन तरीके से की गयी है जिससे दर्शक बरबस ही इस विडियो की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

संगीता ढौंडियाल का कहना है कि नयी धुन, नए कलेवर के साथ. आशा करती हूँ कि आप सबको हमारी ये कोशिश पसंद आएगी।