नयी दिल्ली : दिग्गज अमेरिकी वाहन निर्माता कंपनी जनरल मोटर्स ने दो दशकों तक भारत में संचालन के बाद पिछले महीने यहां से निकलने का ऐलान कर दिया। कंपनी भारत में कारें बेचना बंद कर देगी और पुणे के तालेगांव स्थित उसके प्लांट से निर्यात के मकसद से ही उत्पादन होगा। इसके साथ ही, वह गुजरात के हलोल स्थित अपने संयंत्र को बंद करने जा रही है। दरअसल, कंपनी को भारत में पांव जमाने में बहुत परेशानी हो रही थी। 2016-17 में उसने भारत में महज 25,823 कारें बेची थीं जो यहां बिकी कारों का महज 1% है। कंपनी के हालिया फैसले से इसके डीलर और ग्राहक अब भी हैरान हैं।

भारत जैसे बाजार में कम-से-कम 17 कार निर्माता कंपनियां हैं और इनमें से टॉप चार कंपनियों का 75 प्रतिशत बाजार पर नियंत्रण है। ऐसे में यह शंका होना लाजिमी है कि जनरल मोटर्स के बाद कुछ और कंपनियां भारत से अपना-अपना काम-काज समेटन सकती हैं। यह भी स्पष्ट है कि कई कंपनियों के लिए न केवल भारत बल्कि ग्लोबल हेडक्वॉर्टर्स में भी परिस्थितियां अनुकूल नहीं हैं। आइए जानते हैं कुछ वैसी कार कंपियों का हाल, जिन्हें भारत में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है…

फोक्सवैगन इंडिया की ही बात कर लें। एक के बाद एक इसके सेल्स डिविजन के सीनियर अफसर कंपनी को अलविदा कह रहे हैं। खबर है कि सेल्स हेड, कॉर्पोरेट सेल्स के नैशनल हेड और साउथ सेल्स मैनजर ने कंपनी छोड़ दी है। दुनिया की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी जिसके पूरे ग्रुप ने पिछले साल 1 करोड़ से ज्यादा कारें बेची। लेकिन, भारत में इसे जूझना पड़ रहा है। फोक्सवैगन ब्रैंड के बैनर तले भारतीय यूनिट ने 2016-17 में 50,042 कारें बेचीं और 1.6 प्रतिशत मार्केट पर कब्जा किया।

फोक्सवैगन इंडिया के एमडी भी मानते हैं कि भारत दुनिया के जटिल बाजारों में एक है। उन्होंने कहा, ‘अगर आप यहां सफल हो गए तो इसका मतलब है कि आपको दुनिया के ऐसे कई बाजारों में कामयाबी मिल जाएगी। हमें पता है कि भारतीय बाजार आने वाले वर्षों में बड़े बाजारों में शुमार होनेवाला है।’

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