कैग ने दिखाया शिक्षा विभाग को आईना

गैरसैण । प्रदेश की शिक्षा विभाग की खस्ता हालत का खुलासा कैग की रिपोर्ट में भी हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में 83 प्रतिशत विद्यालय बिना कमरों के, 76 प्रतिशत बिना लाइब्रेरी के, 55 प्रतिशत बिना खेल मैदान के, 50 प्रतिशत बिना कम्प्यूटर कक्ष के, 48 प्रशित बिना विज्ञान प्रयोगशाला के तथा 14 प्रतिशत बिना बिजली के चल रहे हैं। जिसमें कैग का आरोप है कि इस तरह के विद्यालय रमसा के मुख्य उद्देश्यों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहे हैं।

भराड़ीसैण के नव निर्माणाधीन  वीर चन्द सिंह गढवाली विधनसभा भवन में आयोजित विधनसभा सत्रा के दौरान 31 मार्च 2015 में समाप्त हुए वर्ष की कैग रिपोर्ट पेश की गयी। जिसमें भारी अनियमितता का खुलासा हुआ। रिपोर्ट में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किये गये हैं। कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि बनाये गये विद्यालयों में मानकों के हिसाब से निर्माण नहीं किया गया है। इमारत की नींव मानकों के अनुरूप नहीं की गयी है।

शिक्षा विभाग को शिक्षा का स्तर सुधरने के लिए 167.14 करोड़ रुपये दिये गये थे लेकिन केवल 47 प्रतिशत ध्न का प्रयोग ही विभाग कर पाया। जबकि 88.33 करोड़ रुपये का इस्तेमाल ही नहीं किया गया। जिसके कारण केवल 25 प्रतिशत निर्माण कार्य ही पूर्ण हो सके। जिस वजाह से बच्चे बुनियादी सुविधओं से वंचित रह गये। 271 उच्चीकृत विद्यालयों में से 126 विद्यालयों में कक्षा 9 में छात्रों को नामांकन 25 प्रतिशत से कम रहा।

जबकि भारत सरकार द्वारा उपलब्ध् धनराशि के बावजूद विभाग व्यवसायिक शिक्षा देने में नाकाम रहा।  शिक्षा विभाग को सूचनए एवं संचार प्रोद्योगिकी में 6.67 करोड़ रुपये उपलब्ध् होने के बावजूद भी इसका लाभ छात्रों को नहीं दे पाया।  मध्याह्न भोजन में नये चयनित 120 विद्यालयों में से केवल 50 विद्यालयों के छात्रों को ही मध्याह्न भोजन मिल पाया। विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने की योजना असपफल रही, क्योंकि 2010-15 मेें नामांकन 22 प्रतिशत घटा है।

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