लोकगायक के जीवन पर्यन्त रचे-गाए गीतों व कविताओं का हुआ गायन 

सुप्रसिद्ध गायक-गायिकाओं ने उनके जनगीत गाकर जयन्ती समारोह को बनाया सफल 

सी एम पपनैं

नई दिल्ली। उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध लोकगायक व जनकवि हीरा सिंह राणा का 77वा जयंती समारोह ‘लोक संस्कृति सम्मान दिवस’ के रूप में भव्य आयोजन कर मनाया गया। उत्तराखंड के अनेकों प्रवासी जनो के सहयोग से पश्चिमी विनोद नगर स्थित दुर्गा मंदिर प्रांगण मे इस अवसर पर लोकगायक के जीवन पर्यन्त रचे-गाए गीतों व कविताओं पर प्रबुद्ध वक्ताओं ने लोकगायक के कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। सुप्रसिद्ध गायक-गायिकाओं ने उनके जनगीत गाकर जयन्ती समारोह को सफल बनाया।

मुख्य वक्ताओं मे समाज सेवी खीम सिंह रावत व के एस उजराणी, कुमाउनी लोक कवि पुरन चंद्र कांडपाल, शिक्षाविद प्रकाश लकचोरा व रामकृष्ण जोशी, निगम पार्षद गीता रावत व नेशनल फैडरेशन आफ न्यूजपेपर इम्पलाइज के राष्ट्रीय महासचिव चंद्रमोहन पपनैं ने उत्तराखंड के सु-विख्यात मौलिक रचनाधर्मी व सुर सम्राट हीरा सिंह राणा के कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला।

वक्ताओं ने व्यक्त किया, राणा जी ने अपने सरोकारों को अपने गीतों मे रच कर उत्तराखंड के लोक साहित्य व लोक गायन पर अपनी सृजनशीलता निरंतर बनाए रखी है। अपने मधुर कंठ के गायन व हुड़का वादन से लोगो को बहुत रिझाया है। जिसे सुनने को लोग सदा ललाइत रहे हैं। श्रोताओं ने जब भी जिस गीत को गाने की फरमाइश की राणा जी ने सहर्ष गाया। यह धारणा हीरा सिंह राणा जी को एक जनगायक की प्रसिद्धि की ओर ले गया। चेतना जगा कर फलक का व्यापक रहना, समाज की संवेदनाओ को कविताओं व गीतों मे उतार कर निराले प्रभावशाली अंदाज मे प्रस्तुत कर समाज के प्रत्येक वर्ग को झकझोरना, जिनमे दुःख, दर्द,संघर्ष व पलायन की पीड़ा के साथ-साथ प्रकृति का सौन्दर्य भी समाया रहा, राणा जी की रचनाशीलता की ताकत के रूप मे चरितार्थ हुआ।

वक्ताओं ने कहा राणा जी के रचे गीतों व कविताओं मे पहाड़ के सुख-दुःख, पलायन, लोकसंस्कृति व लोकजीवन के दर्शन व्यापक रूप मे होते हैं। गीतों व कविताओ मे पिरोये गए शब्दों का गहराई से अवलोकन कर उनमे समुद्र की गहराई देखी जा सकती है।

वक्ताओं ने व्यक्त किया, जन आंदोलनों के दौरान राणा जी के स्व-रचित क्रांतिकारी गीतों व उनकी गायकी ने न सिर्फ उत्तराखंड के जनमानस बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चेतना जगाने का कार्य किया, जिस बल आपको राष्ट्रीय कवि का दर्जा देने मे जनमानस अपना स्वयं का सम्मान समझता है।

वक्ताओं ने कहा, राणा जी की रचनाओं ने लोगो को जीवन के उतार चढ़ाव के रास्तों से अवगत कराया। लोगों को संघर्ष करने की सीख प्रदान की। निष्ठा व सच्चाई की राह भी सुझाई। यह रचनाधर्मिता एक मिशाल के रूप मे ही नही देखी गई, बल्कि राणा जी की प्रसिद्धि व खासियत के रूप मे चर्चा का विषय बनी रही।

वक्ताओं ने कहा, हीरा सिंह राणा की अपार व अदभुत कला को नही आंका जा सकता। आपके गीतों को सुन प्रवास मे गांव की याद आती है, अपनी जडों से मिलने का अवसर मिलता है। आप उत्तराखंड की गायन कला का संवर्धन करते रहे, प्रेरणा श्रोत बने रहे, लोग कामना करते हैं।

वक्ताओं ने अपने वक्तव्यो मे सवाल खड़ा कर कहा- दुर्भाग्य! हमारे उत्तराखंड राज्य व केंद्र सरकार ने हीरा सिंह राणा जैसे ख्यातिप्राप्त जनकवि, लोकगायक व रचनाधर्मी को जो करोड़ो लोगो के दिल मे वास करता है, को अब तक राष्ट्रीय सम्मानों से वंचित रखा, यह कहा तक न्यायोचित है?

गायिका कौशल पांडे, मधु बेरिया साह, मीना कंडवाल, प्रकाश काला, प्रेम मठपाल तथा ग्रेट मिशन स्कूल विनोद नगर के बाल कलाकारों द्वारा हीरा सिंह राणा के रचे व गाए गीतों की मनोहारी प्रस्तुतियो ने ठसाठस भरे प्रांगण मे बैठै श्रोताओं को झूमने को मजबूर किया। गीत थे-

अहा रे जमाना…।
त्यर पहाड़, म्यर पहाड़…।
लस्का कमर बादा…।
म्येरी मानिले डानि…।
अड़ कसे छै तू, आजकल है रे ज्वाना…।
आ लिली बाकरी लिली…।

दिल्ली सरकार के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की अनुपस्थिति मे उनके ओएसडी ने हीरा सिंह राणा को 77वी जयन्ती पर शुभकामनाऐ दी तथा राणा जी द्वारा जीवनपर्यन्त की गई रचनाधर्मिता व लोकगायन की प्रशंसा की। साथ ही कुमाउनी-गढ़वाली-जौनसारी बोली-भाषा अकादमी के जल्द ही दिल्ली मे स्थापित होने की सूचना से श्रोताओं को अवगत कराया।

हीरा सिंह राणा ने दिल्ली सरकार के ओएसडी, आयोजको, सभी वक्ताओं तथा गीतकारों का विशेष आभार व्यक्त किया व उनके दुःख-दर्द मे समय-समय पर आर्थिक मदद करने वाले सभी जनो का आभार व्यक्त किया। लोगो की फरमाइश पर उनके पसंदीदा गीत व कविताए सुनाई। अपने बीते दिनों की यादो को बया कर उन्हे तरो ताजा किया।

कार्यक्रम आयोजन मुखिया दिवान सिंह नयाल व स्थानीय निगम पार्षद सुनयना बिष्ट ने सभी वक्ताओं, गायकों उपस्थित संगीतकारो, साहित्यकारो, पत्रकारों व राणा जी के प्रशंसको का जयन्ती समारोह मे आकार कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर कुमाउनी, गढ़वाली व जौनसारी बोली-भाषा के ध्वज वाहक, जनकवि व लोकगायक हीरा सिंह राणा को उनके प्रशंसको द्वारा ढ़ेरों उपहार भेट किए गए। समाजसेवी हरदा उत्तरांचली 50 सदस्यीय टीम द्वारा केक काटा गया व अपने पसंदीदा लोकगायक को आर्थिक मदद स्वरूप ग्यारह हजार का चैक भेट किया।

Advertisements