हिमालयी राज्यों के 13 विश्वविद्यालय हिमालय के हितों की शोध परियोजनाओं पर एक साथ मिलकर करेंगे काम

हिमालयी राज्यों के केंद्रीय विश्व विद्यालय संघ का हुआ गठन

संघ के उद्देश्य पर एक नज़र 

  • हिमालय की धरोहर को संरक्षित किया जाएगा। 

  • स्थानीय निवासियों की समस्याओं का सामाजिक व वैज्ञानिक समाधान ढूंढा जाएगा। 

  • हिमालयी राज्यों से पलायन को रोकने के उपाय किए जाएंगे। 

  • हिमालय के निवासियों की आय बढ़ाने के तरीके ढूंढे जाएंगे। 

  • आपदाओं से होने वाले नुकसान को न्यूनतम करने की दिशा में काम होगा। 

  • स्थानीय नौजवानों को रोजगार उपलब्ध कराने वाली शिक्षा दी जाएगी। 

देवभूमि मीडिया ब्यूरो 

देहरादून : केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक की सोच पर यदि हिमालयी राज्यों के विश्वविद्यालयों ने गंभीरता से कार्य किया तो आने वाले समय में अपनी ढपली अपना राग बजा रहे ये सभी विश्वविद्यालय हिमालयी इलाकों के लिए लाभप्रद साबित हो सकते हैं इतना ही नहीं उनकी इस सोच से हिमालयी राज्यों का कायाकल्प  हो सकता है। 

केंद्रीय विश्व विद्यालय संघ का गठन उत्तराखंड के लिए ही नहीं अपितु समूचे हिमालयी राज्यों के लिए वरदान साबित हो सकता है।  इसके अस्तित्व में आने से ये सभी विश्वविद्यालय यहां के जल, जंगल और जमीन सहित स्वरोजगार और शिक्षा जैसे महत्वपूर्व विषयों पर सोचने को मज़बूर होंगे। जिससे इन राज्यों की आर्थिकी तो सुदृढ़ होगी ही साथ ही पलायन जैसे गंभीर मसले पर भी रोक लगाए जाने की संभावना है। 

केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक की इस सोच के आधार बनाते हुए हिमालयी राज्यों के केंद्रीय विश्व विद्यालय हिमालय के परिप्रेक्ष्य में शोध और विकास कार्य के लिए एक मंच पर आ गए हैं। इसके लिए भारतीय हिमालयी राज्यों के केंद्रीय विश्व विद्यालय  संघ का गठन भी किया गया है।

गढ़वाल विश्व विद्यालय का दीक्षांत समारोह संपन्न होने के बाद यहां मानव संसाधन विकास मंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक की अध्यक्षता में हुई बैठक में संघ को औपचारिक मान्यता मिल गई। अब हिमालयी राज्यों में स्थापित 13 केंद्रीय विश्व विद्यालय आपस में विचार विमर्श के बाद हिमालय के हितों की शोध परियोजनाओं पर एक साथ मिलकर काम करेंगे। 

यहां देश के विभिन्न विश्व विद्यालयों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक में डा. निशंक ने विश्व विद्यालयों के प्रतिनिधियों से कहा कि वह हिमालय की अमूल्य संपदा और जैव विविधता के साथ-साथ हिमालय के पारंपरिक आयुर्वेद व जड़ी बूटियों के संरक्षण पर कार्य करें। इस महत्वपूर्व बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने हिमालय पर किए गए कार्यों और अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि हिमालय में स्थापित विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों को हिमालय की मजबूती के लिए कार्य करना होगा। उन्होंने इसमें केंद्र से पूरी मदद करने का आश्वासन दिया।

हिमालय को संरक्षित करने और वन संपदा को बढ़ाने के लिए सभी को मिल जुलकर कार्य करने का सुझाव विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डा. योगेंद्र नारायण ने दिया। जबकि गढ़वाल विश्व विद्यालय की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने संघ की स्थापना और उद्देश्यों की जानकारी दी। कार्यक्रम समन्वयक और भू विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. वाईपी सुंद्रियाल ने हिमालय की समस्याओं, हिमालय की संपदा और गढ़वाल विवि के योगदान पर प्रजेंटेशन दिया। 

इस अवसर पर नार्थ ईस्टर्न हिल विश्व विद्यालय के कुलपति प्रो. एसके श्रीवास्तव,  असम यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. दिलीप चंद्र नाथ, सिक्किम यूनिवर्सिटी के कुलपति के प्रतिनिधि प्रो. शांति शर्मा, कश्मीर विश्वविद्यालय के कुलपति के प्रतिनिधि प्रो. आदिल बशीर, वडिया भूविज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. कला चांद सेन व जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालय पर्यावरण एवं सतत विकास संस्थान के वैज्ञानिक प्रभारी डा. आर. मैखुरी ने प्रतिभाग किया। 

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