देहरादून : तबादला एक्ट और शिक्षा विभाग के सुगम-दुर्गम के खेल के बीच में ही शासन ने शिक्षकों के अनिवार्य तबादले की सूची तय कर दी। इतना ही नहीं शिक्षकों से दस विद्यालयों का विकल्प भी मांग लिया। अब तमाम शिक्षक आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंच गए हैं। ये शिक्षक दस साल से अधिक दुर्गम के विद्यालय में सेवा के बाद दो साल पहले ही सुगम के विद्यालय आए और अब फिर से उन्हें दुर्गम के विद्यालय भेजा जा रहा है।

शिक्षा विभाग के सुगम-दुर्गम चिह्नीकरण के अजीबोगरीब खेल में फंसे 125 से अधिक शिक्षक हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। तबादला आदेश के खिलाफ करीब दो हजार शिक्षकों के प्रत्यावेदन देने से शिक्षा विभाग मुश्किल में पड़ गया है। यही नहीं कोर्ट में मामला पहुंचने के बाद तबादला सूची में शामिल शिक्षकों ने विकल्प देने से मना कर दिया है।

2016 में अपर मुख्य सचिव रणवीर सिंह ने शासनादेश जारी किया था। तबादला नियमावली के अनुसार राज्य के 220 दुर्गम के विद्यालय सुगम श्रेणी तो 148 विद्यालय दुर्गम में रखे गए। दशकों तक दुर्गम की सेवा के बाद शिक्षकों को सुगम में तैनाती मिली मगर अब फिर से उन्हें दुर्गम के विद्यालय भेजा जा रहा है।

तबादला एक्ट के तहत विभाग ने दस साल या इससे अधिक सुगम में कार्यरत शिक्षकों को अनिवार्य तबादले की श्रेणी में शामिल कर लिया। इस वजह से सैकड़ों शिक्षकों की पूर्व की दुर्गम विद्यालयों की सेवा को भी सुगम मान लिया गया। ऐसा विद्यालयों की नए सिरे से श्रेणी निर्धारण की वजह से हुआ। अब करीब सवा सौ शिक्षकों ने दुर्गम-सुगम के अजीबोगरीब खेल से खुद को बचाने के लिए हाईकोर्ट में दस्तक दे दी है।

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